1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो गया है, जिससे 1961 से चल रहा पुराना कानून अब समाप्त हो गया। हालांकि टैक्स स्लैब में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। बदलावों का उद्देश्य टैक्स नियमों और कानूनी भाषा को सरल बनाना है ताकि करदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान हो सके।
डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर बढ़ा टैक्स बोझ
शेयर बाजार में फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग करने वालों के लिए यह बदलाव महंगा साबित हो सकता है। अब फ्यूचर सौदों पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) 0.02% से बढ़ाकर 0.05% हो गया है, जबकि ऑप्शन ट्रेड पर यह 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है।
ITR भरने की डेडलाइन में मिली राहत
करदाताओं को टैक्स जमा करने के लिए कुछ राहत मिली है। जिन लोगों का ऑडिट नहीं होता, उनके लिए ITR-3 और ITR-4 जमा करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। ITR-1 और ITR-2 की डेडलाइन पहले की तरह 31 जुलाई ही रहेगी।
TCS दरों में बदलाव
टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) की दरों में भी बदलाव किए गए हैं। शराब और स्क्रैप पर अब 2% TCS लगेगा, जबकि पहले यह 1% था। इसके अलावा कोयला और आयरन जैसे खनिजों की बिक्री पर भी 2% TCS लागू होगा।
विदेश खर्च पर राहत
विदेश यात्रा, पढ़ाई और इलाज के लिए भेजी जाने वाली रकम पर अब TCS 2% ही लगेगा। पहले यह अलग-अलग दरों में 5% और 20% थी। इससे विदेश जाने वाले करदाताओं को राहत मिलने वाली है।
इन बदलावों से करदाताओं के लिए टैक्स प्रक्रिया आसान तो होगी, लेकिन कुछ सेक्टर्स और डेरिवेटिव ट्रेडिंग में खर्च बढ़ सकता है।















