बिजनेस डेस्क : नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट एक्सपोर्ट और कंटेनर की उपलब्धता में चुनौतियों के बावजूद भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में ग्रोथ पॉजिटिव रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि FY26-28E के लिए ऑटोमोबाइल सेक्टर में अच्छी सेल्स ग्रोथ की संभावनाएं हैं।
मार्च 2026 में प्रोडक्शन चुनौतियों के बावजूद होलसेल में तेजी जारी रहने की संभावना है। इस वृद्धि का मुख्य कारण बेहतर अफोर्डेबिलिटी, नए प्रोडक्ट लॉन्च और सही फाइनेंसिंग उपलब्धता के कारण ग्राहक की पॉजिटिव सोच है।
टू-व्हीलर इंडस्ट्री:
घरेलू वॉल्यूम डबल डिजिट में बढ़ने की उम्मीद है।
TVS मोटर का वॉल्यूम 25% बढ़कर 5,20,000 यूनिट्स, बजाज ऑटो 19% बढ़कर 4,40,000 यूनिट्स होगा।
हीरो मोटोकॉर्प का वॉल्यूम 9% बढ़कर 6,00,000 यूनिट और आयशर-RE 8% बढ़कर 1,09,000 यूनिट होने की संभावना।
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट:
वॉल्यूम डबल डिजिट में बढ़ सकता है, नए प्रोडक्ट और बेहतर अफोर्डेबिलिटी से सपोर्ट।
टाटा मोटर्स PV का वॉल्यूम 22% बढ़कर 63,800 यूनिट, महिंद्रा एंड महिंद्रा 18% बढ़कर 99,000 यूनिट, मारुति सुजुकी 11% बढ़कर 2,15,000 यूनिट।
हुंडई में मामूली 1% बढ़ोतरी, 68,000 यूनिट तक पहुंच सकती है। मिडिल ईस्ट में एक्सपोज़र के कारण हुंडई के एक्सपोर्ट पर थोड़े समय के लिए असर रह सकता है।
कमर्शियल व्हीकल इंडस्ट्री:
घरेलू मार्केट में 10% से अधिक वॉल्यूम ग्रोथ की उम्मीद।
GST कटौती, बेहतर फ्रेट और फाइनेंसिंग की उपलब्धता मुख्य कारण।
आयशर-VECV का वॉल्यूम 15% बढ़कर 13,900 यूनिट, अशोक लेलैंड 14% बढ़कर 27,500 यूनिट, टाटा मोटर्स CV 13% बढ़कर 46,500 यूनिट।
ट्रैक्टर इंडस्ट्री:
GST कटौती और राज्य सब्सिडी के कारण मार्च 2026 में वॉल्यूम बढ़ेगा।
M&M फार्म का वॉल्यूम 12% बढ़कर 39,000 यूनिट और एस्कॉर्ट्स 10% बढ़कर 12,500 यूनिट होने का अनुमान।
रिपोर्ट में निष्कर्ष निकालते हुए कहा गया है कि ऑटो सेक्टर का ग्रोथ ट्रेंड मजबूत है और FY26 में यह भारत के आर्थिक विकास में अहम योगदान देगा।















