राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से आरोपी आयुष वार्ष्णेय की रेगुलर ज़मानत अर्ज़ी पर जवाब मांगा। वह फिलहाल 30 मार्च तक ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं।
बता दें, आयुष वार्ष्णेय, जो IIT टॉपर हैं, को CBI ने 20,000 करोड़ रुपये के कथित बिटकॉइन स्कैम में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि वह श्रीलंका भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन लुकआउट सर्कुलर के कारण उन्हें एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया।
बता दें, एडिशनल चीफ़ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) मयंक गोयल ने CBI से इस मामले में जवाब मांगा और मामले को 25 मार्च को बहस के लिए लिस्ट किया। वार्ष्णेय की तरफ से उनके वकील ध्रुव गुप्ता ने ज़मानत अर्ज़ी दी है।
17 मार्च को, लिंक एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) नीतू नागर ने आयुष वार्ष्णेय को 30 मार्च तक ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजने का आदेश दिया। उन्हें IPC की धारा 406, 420 और इन्फॉर्मेशन एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है।
आयुष वार्ष्णेय डार्विन लैब्स के को-फाउंडर बताए जा रहे हैं। CBI के अनुसार, यह मामला 2015 में शुरू हुई गेन बिटकॉइन स्कीम से जुड़ा हुआ है, जिसे अमित भारद्वाज (अब मृतक), उनके भाई अजय भारद्वाज और उनके नेटवर्क ने शुरू किया था।
आरोप है कि इन्वेस्टर्स को 10 प्रतिशत रिटर्न का लालच दिया गया था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कई FIR दर्ज की हैं और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट भी इस मामले में पैरेलल जांच कर रहा है।














