भारत की केमिकल इंडस्ट्री को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। मैकिन्से की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक दबाव और चुनौतियों के बावजूद भारतीय केमिकल सेक्टर में मजबूत ग्रोथ की संभावना बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक भारत का केमिकल मार्केट 230 से 255 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है, जो वर्तमान में लगभग 155 से 165 अरब डॉलर के बीच है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की मजबूत घरेलू मांग, कम लागत पर उत्पादन की क्षमता और ग्लोबल वैल्यू चेन में बढ़ती हिस्सेदारी इस सेक्टर को मजबूती दे रहा है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर केमिकल इंडस्ट्री इस समय ओवरकैपेसिटी, कमजोर मांग और कीमतों पर दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसका असर भारत पर भी पड़ा है और शॉर्ट टर्म में कंपनियों का प्रदर्शन प्रभावित हुआ है।
इसके बावजूद, भारत की केमिकल इंडस्ट्री के 8 से 9 प्रतिशत CAGR की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो देश की GDP ग्रोथ से भी आगे निकल सकती है। इस ग्रोथ को कंज्यूमर गुड्स, पैकेजिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और इंडस्ट्रियल एक्टिविटी से मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियों को केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें ग्लोबल सप्लायर बनने की दिशा में अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। कंस्ट्रक्शन, सेमीकंडक्टर, रिन्यूएबल एनर्जी और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर आने वाले समय में केमिकल इंडस्ट्री के लिए बड़े ग्रोथ ड्राइवर साबित होंगे, जो 2030 तक 30 से 35 अरब डॉलर का अतिरिक्त रेवेन्यू जोड़ सकते हैं।
इसके अलावा, भारत का 31 अरब डॉलर का केमिकल ट्रेड डेफिसिट घरेलू कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है। इनऑर्गेनिक और पॉलिमर जैसे क्षेत्रों में लोकल उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत किया जा सकता है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि हाल के वर्षों में रेवेन्यू ग्रोथ सीमित रही है और कई सेगमेंट में मुनाफा घटा है। चीन से बढ़ते एक्सपोर्ट और गिरती कीमतों ने प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है।
मैकिन्से के अनुसार, भविष्य में वही कंपनियां सफल होंगी जो इनोवेशन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, डिजिटल टेक्नोलॉजी और AI आधारित ऑपरेशन्स पर फोकस करेंगी। आने वाला दशक भारत को वैश्विक केमिकल सेक्टर में एक बड़ी ताकत बना सकता है, बशर्ते कंपनियां सही रणनीति और निवेश के साथ आगे बढ़ें।














