भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को उतार-चढ़ाव का माहौल देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत में मजबूती के संकेत मिलने के बावजूद बाजार ज्यादा देर तक बढ़त बनाए नहीं रख सका और शुरुआती तेजी के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में आ गए।
निफ्टी 50 इंडेक्स 23,493.20 के स्तर पर खुला, जिसमें 84.40 अंकों यानी 0.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। वहीं बीएसई सेंसेक्स 75,824.17 के स्तर पर खुला और 321.32 अंकों यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई।
हालांकि शुरुआती मजबूती के बावजूद बाजार में दबाव देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती दिखाई, लेकिन यह ट्रेंड लंबे समय तक कायम नहीं रह सका।
बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के मुताबिक, सोमवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने कैश इक्विटी सेगमेंट में 9000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की थी। इसके बावजूद दिन के अंत में वित्तीय और ऑटो सेक्टर में तेजी के चलते बाजार हरे निशान में बंद हुआ था।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें चिंता का बड़ा कारण बनी हुई हैं। ईरान से जुड़े तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर असर के चलते कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे कीमतों में तेजी बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 2.82 प्रतिशत बढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
कमोडिटी मार्केट की बात करें तो सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना 1,56,653 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी की कीमत 2,59,160 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही।
संस्थागत निवेशकों के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 9,366 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 12,593 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार को सहारा दिया।
एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई 225, हांगकांग का हैंग सेंग, ताइवान का वेटेड इंडेक्स और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सभी बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। वहीं अमेरिकी बाजार भी सोमवार को मजबूती के साथ बंद हुए, जिससे शुरुआती कारोबार में भारतीय बाजार को सपोर्ट मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी।















