Exercise can also increase the benefits of high blood sugar! हाई ब्लड शुगर से जूझ रहे लोगों के लिए एक नई रिसर्च उम्मीद लेकर आई है। हाल ही में सामने आई एक स्टडी के मुताबिक हाई-फैट कीटो डाइट (Ketogenic Diet) एक्सरसाइज के फायदे को बढ़ाने में मदद कर सकती है। शोध में पाया गया कि जब शरीर में ब्लड शुगर ज्यादा होता है तो कई बार व्यायाम के पूरे फायदे नहीं मिल पाते, लेकिन सही डाइट इस स्थिति को बदल सकती है।
अमेरिका के वर्जीनिया टेक (Virginia Tech) की एक्सरसाइज मेडिसिन वैज्ञानिक सारा लेसार्ड के नेतृत्व में हुई इस रिसर्च में पाया गया कि कीटो डाइट से ब्लड शुगर सामान्य स्तर पर आ सकता है और इससे मांसपेशियों की एक्सरसाइज के प्रति प्रतिक्रिया भी बेहतर हो जाती है। इस अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल Nature Communications में प्रकाशित किए गए हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, एक्सरसाइज से शरीर की ऑक्सीजन को उपयोग करने की क्षमता बढ़ती है, जो लंबे समय तक अच्छे स्वास्थ्य और आयु से जुड़ी होती है। नियमित व्यायाम वजन नियंत्रित करने, दिल को मजबूत बनाने और मांसपेशियों के विकास में मदद करता है। लेकिन जिन लोगों का ब्लड शुगर स्तर ज्यादा होता है, उन्हें अक्सर एक्सरसाइज के ये फायदे पूरी तरह नहीं मिल पाते।
स्टडी में यह भी बताया गया कि हाइपरग्लाइसीमिया (उच्च रक्त शर्करा) दिल और किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है और शरीर की मेटाबॉलिक प्रतिक्रिया को प्रभावित करता है। ऐसे में खान-पान में बदलाव इस समस्या को कम करने में मददगार हो सकता है।
शोध के दौरान हाई ब्लड शुगर वाले चूहों को कीटोजेनिक डाइट दी गई, जिसमें फैट ज्यादा और कार्बोहाइड्रेट बहुत कम होता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि सिर्फ एक हफ्ते के भीतर ही उनके ब्लड शुगर स्तर सामान्य हो गए। शोधकर्ता सारा लेसार्ड ने बताया कि एक सप्ताह बाद ऐसा लगा मानो इन चूहों को डायबिटीज थी ही नहीं।
समय के साथ इस डाइट ने चूहों की मांसपेशियों की संरचना में भी बदलाव किया। शोधकर्ताओं ने देखा कि उनकी मांसपेशियां ज्यादा ऑक्सीडेटिव क्षमता वाली बन गईं, जिससे एरोबिक एक्सरसाइज का असर अधिक प्रभावी हुआ। जिन चूहों ने कीटो डाइट के साथ नियमित रूप से दौड़ने वाले पहिए पर व्यायाम किया, उनमें स्लो-ट्विच मसल फाइबर अधिक विकसित हुए, जो सहनशक्ति बढ़ाने से जुड़े होते हैं।
कीटोजेनिक डाइट शरीर को कीटोसिस नामक मेटाबॉलिक अवस्था में ले जाती है, जिसमें शरीर ऊर्जा के लिए शुगर के बजाय फैट का उपयोग करने लगता है। यह पारंपरिक लो-फैट डाइट से बिल्कुल अलग तरीका है। हालांकि इस डाइट को लेकर विशेषज्ञों में बहस भी रही है, लेकिन इसे मिर्गी और पार्किंसन जैसी कुछ बीमारियों में फायदेमंद माना गया है। इंसुलिन के व्यापक उपयोग से पहले डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए भी इसी तरह की डाइट का इस्तेमाल किया जाता था।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन बताता है कि डाइट और एक्सरसाइज एक-दूसरे से अलग नहीं बल्कि आपस में जुड़े हुए कारक हैं। अगर दोनों को सही तरीके से अपनाया जाए तो स्वास्थ्य को ज्यादा फायदा मिल सकता है।
फिलहाल यह अध्ययन प्रयोगशाला में चूहों पर किया गया है। वैज्ञानिक अब इस रिसर्च को इंसानों पर भी लागू करके यह जानने की योजना बना रहे हैं कि क्या इसी तरह के परिणाम मनुष्यों में भी देखने को मिलते हैं।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल, जिसमें हेल्थ और फिटनेस की सलाह शामिल है, सिर्फ़ आम जानकारी देता है। इसे क्वालिफाइड मेडिकल राय का विकल्प न समझें। खास हेल्थ डायग्नोसिस के लिए हमेशा किसी स्पेशलिस्ट से सलाह लें।














