पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक किसान ने परंपरागत संसाधन को आय का सशक्त माध्यम बनाकर मिसाल कायम की है। मेहरवानी गांव के निवासी आदित्य त्यागी ने यह साबित कर दिया कि यदि सोच सकारात्मक और नवाचार से भरपूर हो, तो साधारण दिखने वाली चीज भी बड़ी कमाई का जरिया बन सकती है। होली के अवसर पर जहां बाजार रंग और गुलाल से सजे हैं, वहीं आदित्य त्यागी के यहां देसी गाय के गोबर से बने उपलों की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है।
फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर पद से सेवानिवृत्त होने के बाद आदित्य त्यागी ने जैविक खेती और देसी नस्ल की गायों का पालन शुरू किया। उनके पास साहीवाल, थारपारकर, गंगा तिहरी और गिर नस्ल की 6 से 7 गायें हैं। उन्होंने दूध उत्पादन के साथ-साथ गोबर के उपयोग पर ध्यान दिया और छोटे आकार के उपले तथा कंडे बनाकर उन्हें माला के रूप में तैयार करना शुरू किया। करीब 20 से 21 उपलों की एक माला का वजन लगभग 350 ग्राम होता है, जिसे वह 290 रुपये में बेचते हैं।
होली जैसे त्योहारों पर हवन और पूजन में गोबर के उपलों की मांग बढ़ जाती है। इसी कारण इस सीजन में हैदराबाद सहित कई बड़े शहरों से उन्हें लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। हालांकि बढ़ती मांग के कारण समय पर आपूर्ति करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। पिछले आठ महीनों में वह करीब 8 से 9 लाख रुपये के उपले ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से बेच चुके हैं। शुरुआत में बिक्री स्थानीय स्तर पर होती थी, लेकिन बाद में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उत्पाद सूचीबद्ध करने के बाद बिक्री में तेजी आई। पहले तीन दिनों में ही लगभग 9 हजार रुपये की बिक्री ने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।
आदित्य त्यागी का मानना है कि देसी गाय केवल दूध का ही नहीं, बल्कि गोबर और गोमूत्र के माध्यम से भी आय का मजबूत आधार बन सकती है। उनका संदेश है कि किसान यदि संसाधनों की सही पहचान कर नवाचार अपनाएं, तो आत्मनिर्भर बनना संभव है। उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद खुद को इस कार्य में समर्पित किया और आज उनका यह प्रयास अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है।













