Share Market Down Reason. मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली, जिसके चलते निवेशकों के करीब 5 लाख करोड़ रुपये डूब गए। दोपहर 12:30 बजे तक सेंसेक्स में 1019.78 अंकों की गिरावट आई और यह 82,274.88 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 में भी 284.65 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जो 25,428.35 पर था। इससे बीएसई पर कुल मार्केट कैप घटकर करीब 464 लाख करोड़ रुपये रह गया।
क्या आप जानते हैं किन कारणों से आई इतनी बड़ी गिरावट….
आईटी सेक्टर में बिकवाली का दबाव
मंगलवार को भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys) और एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies) जैसी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। इसका प्रमुख कारण एंथ्रोपिक (Anthropic) नामक कंपनी द्वारा दावा किया गया नया क्लाउड कोड टूल था, जो पुराने COBOL सिस्टम को आधुनिक बनाने में मदद कर सकता है। COBOL एक पुरानी प्रोग्रामिंग भाषा है, जो आज भी कई अहम सिस्टमों में इस्तेमाल हो रही है। इससे निवेशकों में इन कंपनियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई।
डोनाल्ड ट्रंप का व्यापारिक रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापारिक रुख ने भी बाजार में गिरावट का कारण बना। ट्रंप ने हाल ही में ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में चेतावनी दी थी कि जो भी देश हालिया अमेरिकी अदालती फैसले के खिलाफ ‘खेल’ खेलेगा, उसे बहुत भारी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। उनके बयान के बाद वैश्विक बाजारों में और अधिक अनिश्चितता पैदा हो गई।
अमेरिकी और एशियाई बाजारों में गिरावट
मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में भी गिरावट का सामना करना पड़ा। वॉल स्ट्रीट पर रात भर हुई बिकवाली के बाद, निवेशकों का विश्वास कम हुआ। MSCI एशिया-पैसेफिक एक्स जापान इंडेक्स में 0.2% की गिरावट आई। इसी तरह, अमेरिका में S&P 500 और नैस्डैक कंपोजिट में भी गिरावट देखी गई, जिससे वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ा।
साप्ताहिक एक्सपायरी का प्रभाव
यह गिरावट निफ्टी 50 डेरिवेटिव्स की साप्ताहिक एक्सपायरी से भी जुड़ी हुई थी। एक्सपायरी के समय ट्रेडर्स आमतौर पर अपनी पोजीशन को समेटते हैं या रोल ओवर करते हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता पैदा होती है। इसके कारण बाजार में तेज हलचल देखी गई, जिससे बिकवाली का दबाव और बढ़ गया।
कमजोर रुपया और इसके प्रभाव
मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.07% गिरकर 90.95 पर पहुंच गया। रुपया कमजोर होने से विदेशी निवेशकों का पैसा बाहर जाने की आशंका पैदा हो गई है, जिससे शेयर बाजार पर दबाव पड़ा। इसके अलावा, रुपये की गिरावट से आयात की लागत बढ़ने की संभावना है, जो कंपनियों की आय को प्रभावित कर सकती है और बाजार के सेंटिमेंट को और कमजोर कर सकती है।















