डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2026 में भारत की राजधानी दिल्ली में हो रहे AI इम्पैक्ट समिट के दौरान एक महत्वपूर्ण बयान दिया। इस समिट का उद्देश्य AI के जरिए ग्लोबल साउथ में विकास, समावेशिता, और सार्वजनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बातचीत करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने AI के वैश्विक विकास में भारत के योगदान की महत्वता पर जोर देते हुए कहा कि भारत को दुनिया की टॉप तीन AI सुपरपावर में से एक बनना चाहिए।
जॉब मार्केट में AI से होने वाली रुकावटों के डर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “तैयारी डर का सबसे अच्छा इलाज है। इसीलिए हम AI से चलने वाले भविष्य के लिए अपने लोगों की स्किलिंग और री-स्किलिंग में इन्वेस्ट कर रहे हैं।” pic.twitter.com/yvGP92hbCr
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 17, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि AI का प्रभावी इस्तेमाल समाज की भलाई के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से भारत के दृष्टिकोण को साझा करते हुए बताया कि AI के जरिए ना केवल देश का विकास होगा, बल्कि इसके माध्यम से विकास के समान अवसर सभी तक पहुंचेंगे, चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण। इस समिट का मोटो “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” था, जो भारत की सभ्यता और उसके समाज की गहरी जड़ों को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि AI को मानव-केंद्रित रखना चाहिए और इसका उद्देश्य ‘सबका भला, सबकी खुशी’ होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने AI को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है, जिससे देश की कई प्रमुख समस्याओं का समाधान किया जा सकेगा। इस समिट में हेल्थकेयर, एजुकेशन, कृषि, और पब्लिक हेल्थ जैसे क्षेत्रों में AI के उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत AI के माध्यम से जो भी पहल करेगा, वह केवल टेक्नोलॉजी के लाभार्थियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए होगा। उन्होंने कहा कि भारत की सरकार AI के विकास के लिए समावेशी डेटासेट, कृषि उत्पादकता, और क्लाइमेट चेंज से संबंधित समाधानों पर काम कर रही है।
AI के विकास में भारत का दृष्टिकोण:
भारत का उद्देश्य AI को एक उपकरण के रूप में देखना है, जो लोगों की सेवा करे, न कि उन्हें बदलने के लिए। प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय युवाओं को आश्वस्त किया कि AI से रोजगार की संभावनाएं और अधिक बढ़ेंगी, और यह हर भारतीय को शक्ति देने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि भारत अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI प्रौद्योगिकी के माध्यम से एक नया रास्ता दिखाएगा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक नया कदम उठाएगा।
पीएम मोदी ने AI के लाभार्थियों के लिए साझा की रणनीतियाँ:
भारत ने AI को प्राइमरी हेल्थकेयर, एजुकेशन, और कृषि में लागू करने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अमूल का उदाहरण देते हुए कहा कि AI की मदद से महिला डेयरी किसानों को बेहतर गाइडेंस मिल रहा है, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ी है। इसके अलावा, AI का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में फसल सलाह, मिट्टी के विश्लेषण और मौसम की जानकारी देने के लिए किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि भारत की AI नीति को हमेशा से ‘सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर’ के रूप में देखा गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसके लाभ केवल कुछ समूहों तक सीमित न रहें।
AI और भारत का भविष्य:
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को AI के क्षेत्र में एक प्रमुख नेता बनने की दिशा में स्पष्ट विज़न साझा किया। उनका कहना था कि भारत को केवल AI का उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि इसका निर्माता भी बनना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि AI मॉडल्स को भारतीय संदर्भ में ढाला जाए और भारतीय भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएं।
भारत ने पहले ही AI से जुड़े बड़े मिशनों की शुरुआत कर दी है। इसके तहत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, AI-इनेबल्ड पब्लिक सर्विसेज़, और वैश्विक स्तर पर AI सॉल्यूशन्स की मांग को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।















