हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया है कि राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 31 मई से पहले हर हाल में कराए जाएं। यह फैसला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सुनाया, जिसमें राज्य सरकार की उन दलीलों को खारिज कर दिया गया, जिनमें परिसीमन का हवाला देकर चुनाव के समय में विस्तार की मांग की गई थी।
खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि परिसीमन के अधूरे काम को चुनाव टालने का कोई वैध कारण नहीं माना जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए कि चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने के लिए सभी विभागों को एकजुट होकर काम करना होगा। इसके साथ ही चुनाव आयोग, पंचायती राज एवं शहरी निकाय विभाग और प्रशासन को जल्द से जल्द चुनाव की अधिसूचना जारी करने के आदेश दिए गए हैं।
इस आदेश के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण रोस्टर तैयार करने की समय सीमा को 28 फरवरी से बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया है। अब राज्य सरकार को इस समय सीमा के भीतर आरक्षण रोस्टर को फाइनल करना होगा। इसके साथ ही वोटर लिस्ट, पुनर्सीमांकन और आपत्तियां दायर करने की प्रक्रिया को भी जारी रखने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसके बाद किसी भी समय विस्तार के लिए कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा था कि जिला परिषद, नगर परिषद और कुछ पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। इसके कारण चुनाव कराने में कठिनाई उत्पन्न हो रही है, और राज्य सरकार को चुनाव के लिए अक्टूबर तक का समय चाहिए। इसके अलावा, ओबीसी कैटेगरी का रोस्टर तैयार करने में भी समय लग रहा था। राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदा को भी चुनाव की प्रक्रिया में रुकावट का कारण बताया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी कारणों को खारिज कर दिया और कहा कि चुनाव समय पर होने चाहिए।
हाईकोर्ट का फैसला
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 9 जनवरी को राज्य चुनाव आयोग और प्रदेश सरकार को 30 अप्रैल से पहले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। राज्य सरकार ने दो मुख्य बिंदुओं पर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। पहला, सरकार का कहना था कि हाईकोर्ट ने आरक्षण रोस्टर जारी करने के लिए चार दिन का समय दिया, जो न्याय संगत नहीं था। दूसरा, प्रदेश में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू होने के कारण क्या पंचायती चुनाव को कुछ समय के लिए टाला जा सकता था, यह एक बड़ा सवाल था।
कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलें खारिज करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कोई गलती नहीं की। कोर्ट ने कहा कि यदि नए परिसीमन में देरी हो रही है, तो चुनाव 2011 की जनगणना और पिछले परिसीमन के आधार पर कराए जा सकते हैं। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह पंचायती चुनाव को समय पर आयोजित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए और चुनाव आयोग, पंचायती राज विभाग और शहरी निकाय विभाग के साथ मिलकर कार्य करें।
पंचायती चुनावों की प्रक्रिया
हिमाचल प्रदेश में 3577 पंचायतें, 90 पंचायत समितियां, 11 जिला परिषद और 71 शहरी स्थानीय निकाय हैं। इन संस्थाओं का पांच वर्षीय कार्यकाल 31 जनवरी और 18 जनवरी को समाप्त हो चुका है। वर्तमान में इन संस्थाओं में प्रशासक नियुक्त किए गए हैं। राज्य सरकार ने इस बीच पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने का दावा किया है, लेकिन नई पंचायतों की अधिसूचना अभी जारी नहीं की गई है।
ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सम्माननीय है और राज्य सरकार 31 मई से पहले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराएगी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल तक चुनाव कराने का आदेश दिया था, लेकिन अब एक महीने का समय और मिल गया है।
राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियां
राज्य निर्वाचन आयोग के सुरजीत सिंह राठौर ने कहा कि चुनाव की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मतदाता सूचियों का प्रकाशन और प्रिंटिंग का काम भी खत्म हो चुका है। अब राज्य निर्वाचन आयोग को केवल आरक्षण रोस्टर का इंतजार है। चुनाव की अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी और चुनाव प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगी।
नई पंचायतों की अधिसूचना
प्रदेश की 31 पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन के प्रस्ताव सरकार के पास आ चुके थे। सरकार का दावा है कि इन पंचायतों का पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन पूरा कर लिया गया है, हालांकि इसकी अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है। पंचायती राज मंत्री ने कहा कि नई पंचायतों की अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी।



