ईरान में जारी संघर्ष ने मानवीय संकट को गंभीर बना दिया है। एक हफ्ते से अधिक समय से चल रहे संघर्ष में अब तक 1,300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, और लगभग 100,000 लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर भागने को मजबूर हो गए हैं। राहत प्रयासों को बढ़ती आवश्यकता के कारण भारी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने प्रभावित लोगों के लिए तात्कालिक मदद की बढ़ती मांग की सूचना दी है।

ईरान की राजधानी तेहरान में, इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने कई ईरानी सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसमें ईरान की क्रांति गार्ड कोर (IRGC) के ईंधन भंडारण संयंत्र शामिल थे। यह कार्रवाई IDF द्वारा की गई एक सैन्य रणनीति का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य ईरानी सेना की आपूर्ति लाइनों को प्रभावित करना था। IDF ने इसे ईरानी “आतंकी शासन” की सैन्य संरचना को और अधिक नुकसान पहुँचाने वाला कदम बताया।

इस संकट के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के नेतृत्व को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है और इसे पृथ्वी पर एक बड़े “कैंसर” को खत्म करने के रूप में वर्णित किया। ट्रंप ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान ने खुद ही एक स्कूल पर बमबारी की थी।

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय विशेषकर यूनाइटेड किंगडम इस बढ़ते संकट को लेकर गहरे चिंता में है, और भारत जैसे देशों के नागरिकों के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि इस संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में सुरक्षा के खतरे बढ़ गए हैं।

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