पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक चिंता और गहरा गई है। 20 से अधिक देशों ने इस अहम समुद्री मार्ग के “व्यवहारिक रूप से बंद” होने की कड़ी निंदा की है और क्षेत्र में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने का संकल्प जताया है।
संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। बयान में बिना हथियार वाले व्यावसायिक जहाजों पर हमलों और तेल-गैस प्रतिष्ठानों समेत नागरिक ढांचे को निशाना बनाए जाने की कड़ी आलोचना की गई।
बता दें, 20 से अधिक देशों ने आरोप लगाया कि ईरान द्वारा उठाए गए कदमों के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही लगभग बाधित हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ रहा है। बयान में कहा गया कि इस तरह की गतिविधियां वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं।
संयुक्त बयान में ईरान से तत्काल सभी आक्रामक गतिविधियों को रोकने की मांग की गई है। इसमें समुद्री मार्गों में बाधा डालने के लिए माइन बिछाने, ड्रोन और मिसाइल हमलों जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने पर जोर दिया गया है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करने की अपील भी की है।
बता दें, देशों ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र आवाजाही एक मूल सिद्धांत है, जिसे हर हाल में बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति जारी रहती है तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा, खासकर उन देशों और समुदायों पर जो ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं।
वहीं, इस संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी बड़ा कदम उठाते हुए आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का निर्णय लिया है। एजेंसी के अनुसार, वैश्विक बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए 400 मिलियन बैरल तेल उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे ऊर्जा आपूर्ति में आई कमी को कुछ हद तक संतुलित करने की कोशिश की जा रही है।
IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान का वैश्विक तेल और गैस बाजार पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने इसे आपूर्ति संकट से निपटने के लिए आवश्यक कदम बताया।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब क्षेत्र में तनाव पहले से ही चरम पर है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले में मौत के बाद हालात और बिगड़ गए। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र और इज़राइल में कई अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों को निशाना बनाया।
इन हमलों के बाद समुद्री रास्तों में असुरक्षा बढ़ गई और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग से अपने जहाजों को हटाना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ रहा है।
स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब सक्रिय रूप से समाधान तलाशने में जुट गया है। कई देशों ने संयुक्त समुद्री सुरक्षा मिशन चलाने और क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की बात कही है, ताकि इस महत्वपूर्ण मार्ग को फिर से सुरक्षित बनाया जा सके।
इसके अलावा, कई देशों ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के माध्यम से प्रभावित देशों को आर्थिक और मानवीय सहायता देने का भी भरोसा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है।



