भारतीय सिनेमा में धार्मिक और पौराणिक कहानियों पर आधारित फिल्मों को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है। ‘हनुमान अंश’ की सफलता और ‘कांतारा’ तथा ‘महावतार नरसिम्हा’ जैसी फिल्मों को मिले दर्शकों के रिस्पॉन्स ने फिल्ममेकर्स का ध्यान इस ओर खींचा है। अब 2026 और 2027 में कई डिवोशनल फिल्मों की रिलीज या निर्माण की योजनाएं सामने हैं। इनमें भगवान राम की कथा से लेकर तुलसीदास, साईं बाबा और खाटू श्याम से जुड़ी कहानियां शामिल हैं।
डिवोशनल फिल्मों पर मेकर्स की नजर
आने वाले समय में धार्मिक आस्था और भारतीय पौराणिक परंपराओं से जुड़ी कई फिल्में दर्शकों तक पहुंच सकती हैं। ‘रामायण: पार्ट 1’ से लेकर ‘महावतार परशुराम’ तक, अलग-अलग विषयों पर फिल्में बनाने की तैयारी की खबरें हैं।
इन फिल्मों के जरिए मेकर्स धार्मिक कथाओं, संतों के जीवन और पौराणिक पात्रों को बड़े पर्दे पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, कुछ फिल्मों की रिलीज डेट और निर्माण की स्थिति अभी संभावित बताई जा रही है।
2026-27 में आने वाली डिवोशनल फिल्मों की सूची
रिपोर्ट में बताई गई फिल्मों और उनकी संभावित टाइमलाइन इस प्रकार है:
- रामायण: पार्ट 1 — नवंबर 2026
- वाल्मीकि रामायण — 2026, संभावित
- तेरा साईं — फरवरी 2027
- चिरंजीवी हनुमान: द इटरनल — फरवरी 2027, संभावित
- हारे का सहारा बाबा खाटू श्याम हमारा — 2027
- कृष्णावतारम् पार्ट 2 — 2027 में संभावित
- महावतार परशुराम — दिसंबर 2027
- राम बोला — 2027 में फ्लोर पर आने की योजना
- हनुमान अंश 2 — अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है
इनके अलावा भी धार्मिक और पौराणिक विषयों पर फिल्मों को लेकर चर्चा जारी है। रिलीज और निर्माण से जुड़ी तारीखों में बदलाव संभव है।
‘हनुमान अंश’ से ‘कांतारा’ तक, दर्शकों ने दिखाई दिलचस्पी
पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक और पौराणिक तत्वों वाली फिल्मों ने दर्शकों का ध्यान खींचा है। ‘कांतारा’, ‘महावतार नरसिम्हा’ और ‘कृष्णावतारम्’ जैसी फिल्मों को मिले रिस्पॉन्स ने इस जॉनर को लेकर फिल्म इंडस्ट्री की दिलचस्पी बढ़ाई है।
‘हनुमान अंश’ की सफलता भी इसी चर्चा का हिस्सा है। फिल्म की कमाई और दर्शकों के बीच इसकी लोकप्रियता ने मेकर्स को यह संकेत दिया है कि भारतीय आस्था, संस्कृति और पौराणिक कथाओं पर आधारित कहानियों के लिए थिएटर में दर्शक मिल सकते हैं।
आखिर क्यों पसंद आती हैं डिवोशनल फिल्में?
डिवोशनल फिल्मों की लोकप्रियता के पीछे दर्शकों का धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव एक अहम वजह माना जाता है। भगवान, संतों और पौराणिक पात्रों की कहानियां कई लोगों के लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विश्वास और परंपरा का हिस्सा भी होती हैं।
ऐसी फिल्मों में भव्य दृश्य, भावनात्मक कहानी और पौराणिक प्रसंग दर्शकों को आकर्षित कर सकते हैं। हालांकि, किसी फिल्म की सफलता उसकी कहानी, प्रस्तुति, अभिनय, प्रचार और दर्शकों की प्रतिक्रिया जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करती है।
फिल्मों के गानों ने भी बनाई अलग पहचान
डिवोशनल फिल्मों के संगीत ने भी दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की है। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ का ‘पार्वती’ गाना सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हुआ और YouTube पर इसे 120 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिलने का दावा किया गया है।
वहीं, ‘कृष्णावतारम्’ के गानों और ‘कांतारा’ के ‘कर्मा’ सॉन्ग ने भी दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई। फिल्मों के गानों का सोशल मीडिया पर इस्तेमाल और रील्स में उनकी लोकप्रियता इन फिल्मों की पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकती है।
‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस कमाई पर चर्चा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने भारत में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन और दुनियाभर में 400 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है। फिल्म को दर्शकों से मिले वर्ड ऑफ माउथ को इसकी कमाई में तेजी आने की वजह बताया गया है।
हालांकि, इन आंकड़ों को स्वतंत्र बॉक्स ऑफिस स्रोतों से सत्यापित करना जरूरी है। इसके बावजूद फिल्म की बताई जा रही सफलता ने धार्मिक और पौराणिक कहानियों पर आधारित फिल्मों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
क्या 2027 बनेगा डिवोशनल फिल्मों के लिए बड़ा साल?
2026 और 2027 में प्रस्तावित फिल्मों की सूची बताती है कि धार्मिक और पौराणिक विषयों पर फिल्में बनाने में निर्माताओं की दिलचस्पी बनी हुई है। तुलसीदास और साईं बाबा जैसे आध्यात्मिक व्यक्तित्वों से लेकर खाटू श्याम और परशुराम जैसे धार्मिक विषयों तक, दर्शकों के सामने कई तरह की कहानियां आ सकती हैं।
अब इन फिल्मों की रिलीज, दर्शकों की प्रतिक्रिया और बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन से पता चलेगा कि ‘हनुमान अंश’ जैसी सफलता इस जॉनर के लिए एक व्यापक ट्रेंड बनती है या नहीं।














