पीलीभीत से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने शहीदों के सम्मान पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यूपी–उत्तराखंड बॉर्डर पर जिला पंचायत की ओर से शहीद-ए-आजम भगत सिंह के नाम पर एक भव्य स्वागत द्वार बनाया गया। लेकिन हैरानी और विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि जिस शहीद के नाम पर यह द्वार बना — उसी की तस्वीर यहां से गायब है।

नेताओं के फोटो से सजा गेट भगत सिंह की फोटो गायब

द्वार पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और कई नेताओं की तस्वीरें साफ दिखाई देती हैं, लेकिन देश के लिए हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ने वाले भगत सिंह की फोटो कहीं नजर नहीं आती।
इतना ही नहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष दलजीत कौर द्वारा खुद की तस्वीर भी इस गेट पर लगवाए जाने की बात सामने आने के बाद लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है।

शहीद के नाम पर सियासत! जिला पंचायत पर सवाल — भगत सिंह के द्वार से उनकी ही तस्वीर गायब

सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है। लोग सवाल पूछ रहे हैं — क्या शहीदों का सम्मान अब सिर्फ नाम तक सीमित रह गया है? क्या देश के नायकों से ज्यादा जरूरी नेताओं की तस्वीरें हो गई हैं? फिलहाल प्रशासन की चुप्पी इस विवाद को और बड़ा बना रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही —जिस शहीद ने देश के लिए जान दी… क्या उसके नाम के द्वार पर उसकी तस्वीर लगाना भी सिस्टम के लिए जरूरी नहीं?

शहीद भगत सिंह का जिला पंचायत में किया अपमान

जिला पंचायत की लापरवाही और संवेदनहीनता को दिखाता है। आरोप है कि द्वार पर नेताओं की तस्वीरें लगाई गईं, यहां तक कि जिला पंचायत अध्यक्ष दलजीत कौर की फोटो भी गेट पर लगवा दी गई, लेकिन शहीद भगत सिंह को ही नजरअंदाज कर दिया गया।

UP News | बेटा ही बना बाप का काल पिता को उतारा मौत के घाट | Lucknow

शेयर करना
Exit mobile version