नई दिल्ली से एक अहम कॉरपोरेट और कानूनी घटनाक्रम सामने आया है, जहां नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने वेदांता लिमिटेड की दो याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इन याचिकाओं में वेदांता ने कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज की बोली के चयन को चुनौती दी थी।
NCLAT की दो सदस्यीय पीठ, जिसमें चेयरपर्सन अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा शामिल थे, ने स्पष्ट कहा कि वेदांता अपील में यह साबित नहीं कर सकी कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के फैसले में किसी प्रकार की कानूनी या प्रक्रियात्मक त्रुटि हुई है। अदालत ने कहा, “अपील में कोई दम नहीं है, इसे खारिज किया जाता है।”
ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) का निर्णय पूरी तरह से व्यावसायिक समझ और रेजोल्यूशन प्लान के समग्र मूल्यांकन पर आधारित था। NCLAT के अनुसार, रेजोल्यूशन प्रोफेशनल द्वारा प्रक्रिया में किसी प्रकार की गंभीर अनियमितता नहीं पाई गई।
वेदांता ने अपनी याचिका में दावा किया था कि उसकी बोली अदाणी ग्रुप की तुलना में वित्तीय रूप से अधिक मजबूत थी। कंपनी का कहना था कि उसकी ऑफर वैल्यू लगभग 3,400 करोड़ रुपये अधिक थी और नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) के आधार पर भी लगभग 500 करोड़ रुपये ज्यादा थी। लेकिन अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
NCLAT ने कहा कि सिर्फ उच्च वैल्यू वाली बोली का मतलब यह नहीं है कि उसे ही स्वीकार किया जाना चाहिए, क्योंकि मूल्यांकन में कैश फ्लो, व्यवहार्यता और निष्पादन क्षमता जैसे कई कारक शामिल होते हैं।
गौरतलब है कि NCLT की इलाहाबाद बेंच ने 17 मार्च को अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी थी, जिसके खिलाफ वेदांता ने अपील दायर की थी। इससे पहले NCLAT ने कोई अंतरिम रोक लगाने से भी इनकार कर दिया था।
अदाणी ग्रुप की बोली को कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स से 89% वोट मिले थे, जिससे वह सबसे आगे रही, जबकि वेदांता और डालमिया भारत पीछे रह गए।
जयप्रकाश एसोसिएट्स, जो रियल एस्टेट, सीमेंट, पावर, होटल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सक्रिय है, जून 2024 में 57,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज डिफॉल्ट के बाद इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया में गई थी।
इस फैसले के बाद अदाणी एंटरप्राइजेज के लिए जेपी ग्रुप के अधिग्रहण का रास्ता और स्पष्ट हो गया है, जबकि वेदांता के लिए यह एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।














