लखनऊ और कानपुर को जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेसवे का लोकार्पण अभी हुआ भी नहीं है और इससे पहले ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालिया बारिश ने एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य की पोल खोल दी है। पुरवा क्षेत्र के पटकापुर, मंगतखेड़ा और तूरी जैसे इलाकों में एक्सप्रेसवे के किनारे की गई भराव वाली मिट्टी धंस गई है, जिससे बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। मिट्टी बहने के कारण किनारे बना पक्का निर्माण भी टूट रहा है, जो भविष्य में बड़े हादसों का कारण बन सकता है।
सुरक्षा के लिहाज से चिंता की बात यह है कि एक्सप्रेसवे पर मवेशियों और लोगों की अनधिकृत आवाजाही रोकने के लिए लगाई गई फेंसिंग (सुरक्षा जालियां) को जगह-जगह से काट दिया गया है। कई स्थानों पर तो पांच से 15 फीट तक की जालियां पूरी तरह से गायब हैं। स्थानीय स्तर पर निर्माण संस्था पीएनसी द्वारा किए गए कार्यों में यह लापरवाही सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।
एनएचएआई का कड़ा रुख, एफआईआर की चेतावनी
इस पूरे मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने अपना रुख सख्त कर लिया है। परियोजना निदेशक नकुल वर्मा ने स्पष्ट किया है कि जहां भी मिट्टी धंसी है, उसे दुरुस्त कराया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने फेंसिंग काटने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले ग्रामीणों को चिह्नित किया जा रहा है और उनके खिलाफ राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के कानून के तहत सख्त मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
बता दें कि 13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रस्तावित है। उद्घाटन से पहले सामने आई इन खामियों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ जहां निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एनएचएआई और ग्रामीणों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। देखना यह है कि उद्घाटन से पहले इन समस्याओं का समाधान कैसे निकाला जाता है।













