लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के जिला न्यायालय परिसर के बाहर आज उस समय भारी बवाल खड़ा हो गया, जब हाईकोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीम अवैध चैंबरों को ढहाने पहुंची। इस कार्रवाई का वकीलों ने कड़ा विरोध किया, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। दोनों ओर से हुए पथराव और पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज में कई पुलिसकर्मी और वकील गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
72 अवैध चैंबरों पर चलना था बुलडोजर
वकीलों के मुताबिक, न्यायालय परिसर के आसपास चिन्हित किए गए लगभग 72 अवैध चैंबरों को हटाने का प्रशासनिक आदेश था। इसी आदेश के अनुपालन में सुबह भारी पुलिस बल और नगर निगम के दस्ते ने बुलडोजर के साथ कार्रवाई शुरू की। देखते ही देखते चैंबर तोड़े जाने के विरोध में सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता सड़कों पर उतर आए और नारेबाजी शुरू कर दी।
रणक्षेत्र बना कोर्ट परिसर, लाठीचार्ज और पथराव
प्रशासनिक कार्रवाई को रोकने के लिए कुछ असामाजिक तत्वों और वकीलों की तरफ से पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी चोटिल हो गए। स्थिति को काबू में करने और उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए पुलिस को मजबूरन लाठीचार्ज करना पड़ा। लाठीचार्ज के बाद कोर्ट परिसर के बाहर भगदड़ मच गई। इस झड़प में कई वकीलों को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें तुरंत बलरामपुर हॉस्पिटल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज जारी है।
वैध चैंबरों को भी तोड़ने का आरोप
अस्पताल पहुंचे घायल वकीलों और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन और नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वकीलों का कहना है कि प्रशासन के पास केवल 72 अवैध चैंबरों को हटाने का आदेश था, लेकिन कार्रवाई की आड़ में पुलिस और नगर निगम ने उन चैंबरों पर भी बुलडोजर चला दिया जो पूरी तरह वैध और नियमों के दायरे में बने हुए थे। वकीलों ने इस कार्रवाई को एकतरफा और दमनकारी बताया है। फिलहाल कोर्ट परिसर और आस-पास के इलाकों में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है।














