भारतीय रेलवे की “52 हफ़्तों में 52 सुधार” पहल के तहत, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को दो महत्वपूर्ण सुधारों की घोषणा की। इन सुधारों में “RailTech पॉलिसी” और “रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (RCT)” का पूरी तरह से डिजिटाइज़ेशन और AI-इनेबल्ड ट्रांसफॉर्मेशन शामिल है। ये सुधार भारतीय रेलवे को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं।
बता दें, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई RailTech पॉलिसी की घोषणा करते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय रेलवे में इनोवेशन को बढ़ावा देना है। इसके तहत, इनोवेटर्स, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और संस्थानों को रेलवे में तकनीकी सुधार लाने के लिए एक साथ लाया जाएगा। नई पॉलिसी के तहत, एक विशेष “रेल टेक पोर्टल” लॉन्च किया गया है, जो इनोवेटर्स के लिए अपनी तकनीकी विचारों को प्रस्तुत करने का एक डिजिटल मंच होगा।
वहीं, इस पोर्टल के माध्यम से इनोवेटर्स के लिए रेलवे के विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों जैसे AI-बेस्ड एलिफेंट इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम (EIDS), ड्रोन-बेस्ड ब्रोकन रेल डिटेक्शन सिस्टम, और AI-बेस्ड पेंशन व विवाद सुलझाने के सिस्टम जैसे मामलों में नए समाधान पेश किए जा सकेंगे। वैष्णव ने कहा कि यह पॉलिसी स्टार्टअप्स और रिसर्चर को रेलवे के साथ संरचित तरीके से जुड़ने का एक अवसर प्रदान करेगी, जिससे रेलवे में तकनीकी बदलाव लाने में मदद मिलेगी।
बता दें, अश्विनी वैष्णव ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (RCT) के डिजिटाइज़ेशन का भी ऐलान किया, जिसके तहत ई-आरसीटी (e-RCT) सिस्टम लागू किया जाएगा। यह नया सिस्टम रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से डिजिटल और AI-इनेबल्ड बना देगा। इसका उद्देश्य क्लेम फाइल करने, प्रोसेस करने और फैसले लेने के तरीके को और अधिक तेज़, पारदर्शी और एक्सेसिबल बनाना है।
वैष्णव ने कहा कि यह सिस्टम पूरे देश में 23 रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल बेंचों पर लागू होगा, जिससे यात्रियों को कहीं से भी, किसी भी समय क्लेम फाइल करने की सुविधा मिलेगी। इससे ट्रिब्यूनल ऑफिस जाने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।
रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे इनोवेशन प्रोजेक्ट्स के लिए आवश्यक डेवलपमेंट फंडिंग का 50 प्रतिशत तक सपोर्ट करेगा। सफल परियोजनाओं के लिए बड़े लॉन्ग-टर्म ऑर्डर दिए जाएंगे। यह पॉलिसी सिर्फ एक्सपेरिमेंट्स के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन की गई है कि सफल इनोवेशन बड़े पैमाने पर लागू हों।
वैष्णव ने बताया कि अगले 12 महीनों के भीतर रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल की सभी बेंचें पूरी तरह से डिजिटाइज़ हो जाएंगी, जिससे न्याय प्रक्रिया तेज़ और सुलभ होगी। इस सुधार के साथ, रेलवे के पास एक पारदर्शी, तेज़ और उपयोगकर्ता-मित्र प्रणाली होगी जो यात्रियों की शिकायतों और क्लेम को बिना किसी बाधा के निपटाएगी।
रेलवे मंत्रालय द्वारा किए गए ये सुधार भारतीय रेलवे को डिजिटल रूप में सशक्त बनाने के प्रयास हैं। इसके तहत न केवल रेलवे की कार्यप्रणाली में सुधार होगा, बल्कि यात्री अनुभव को भी बेहतर बनाया जाएगा। इन सुधारों के सफल कार्यान्वयन से भारतीय रेलवे एक नई दिशा में कदम रखेगा।














