अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी आक्रामक विदेश नीति का संकेत दिया है। रविवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए मांग की है कि रिपब्लिकन पार्टी को प्रस्तावित ‘रशियन सैंक्शन्स बिल’ (रूस प्रतिबंध विधेयक) में ईरान को भी शामिल करना चाहिए। ट्रंप का मानना है कि तेहरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने का यह सबसे उपयुक्त समय है।
यह मांग ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी सीनेट में रूस और उसके सहयोगियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक संशोधित कानून पेश किया गया है। सीनेटर जीन शाहीन, रिचर्ड ब्लूमेंथल और डार्लिन ग्राहम द्वारा पेश किए गए इस बिल का नाम दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में “सीनेटर लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2026” रखा गया है। इस बिल का प्राथमिक उद्देश्य रूस के तेल और गैस निर्यात को निशाना बनाना है, जो यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई के लिए वित्त पोषण का काम करता है।
ट्रंप का तर्क है कि वॉशिंगटन की सर्वोच्च प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें ईरान द्वारा अमेरिका के साथ हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का उल्लंघन करने की कोई परवाह नहीं है। ट्रंप के इस रुख से साफ है कि वे आने वाले समय में ईरान पर अधिक आर्थिक दबाव डालने के पक्षधर हैं।
प्रस्तावित बिल में रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के शीर्ष खरीदारों पर टैरिफ लगाने के सख्त प्रावधान हैं। इसमें रूसी तेल प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का नया अधिकार शामिल किया गया है। साथ ही, यह ‘शैडो फ्लीट’ (रूस की मदद करने वाले गुप्त जहाजी बेड़े) और रूस के सैन्य औद्योगिक आधार को चीनी समर्थन देने वाली कंपनियों को भी निशाना बनाता है। ट्रंप का अब इसे ईरान से जोड़ना इस पूरे कानून के दायरे को व्यापक बनाने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।















