Politics intensifies over ‘US permission’ statement on Russian oil, Jairam Ramesh attacks Modi government. अमेरिका द्वारा भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दिए जाने के बयान पर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है।

दरअसल, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में कहा कि वाशिंगटन ने भारत को अस्थायी रूप से रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी है। इसके बाद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर केंद्र सरकार की आलोचना की।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा कि अमेरिका ने मोदी सरकार को “डोनाल्ड ट्रंप के आदेश मानने का प्रमाणपत्र” दे दिया है। रमेश ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि खुद को “56 इंच का सीना” बताने वाला नेतृत्व अब “कायरतापूर्ण और समझौता करने वाला” बन गया है।

क्या कहा अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने

फॉक्स बिज़नेस को दिए इंटरव्यू में स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने पहले भारत से रूस से तेल खरीद बंद करने को कहा था और भारत ने उस दिशा में कदम भी उठाए थे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अमेरिकी तेल लेने की योजना थी, लेकिन वैश्विक स्तर पर तेल की अस्थायी कमी को देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट दे दी है।

खाड़ी संकट का असर

मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले शिपिंग रूट पर दबाव बढ़ गया है। भारत अपने कुल तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत पश्चिम एशिया से करता है और इसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है।

इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए अस्थायी राहत दी है।

सरकार ने दी सफाई

इस मुद्दे पर सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा स्थिति की नियमित समीक्षा कर रहा है और देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है। सूत्रों के मुताबिक, भारत के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार मौजूद है और हर दिन स्टॉक को भरा भी जा रहा है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी स्पष्ट किया कि देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है। उन्होंने X पर लिखा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों को सस्ता और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है और भारत इस दिशा में पूरी तरह सक्षम है।

मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले के बाद स्थिति और बिगड़ गई। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में इज़राइल और अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमले किए।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत की ऊर्जा नीति और रूस से तेल खरीद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

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