अयोध्या: भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा पूरी आस्था के साथ अर्पित किए जाने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे में बड़ी चोरी और वित्तीय गड़बड़ी का मामला अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। घटना को सामने आए करीब एक सप्ताह का समय बीत चुका है, लेकिन इस महा-चोरी को लेकर अभी तक न तो कोई आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई है और न ही पुलिस प्रशासन की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई शुरू हुई है। इस ढुलमुल रवैये को लेकर अब अयोध्या से लेकर देश भर के श्रद्धालुओं के बीच गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट फिलहाल इस पूरे मामले को पुलिस के हवाले करने के बजाय अपने स्तर पर ही दबाकर आंतरिक जांच में जुटा हुआ है। दान पेटिकाओं (डोनेशन बॉक्स) को खोलने की प्रक्रिया, नकदी की गिनती, बैंक खातों के रजिस्टर, रसीदें और पिछले कई दिनों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज का मिलान तकनीकी और वित्तीय विशेषज्ञों द्वारा कराया जा रहा है।
4 वर्षों से चल रहा था खेल, ‘जमीन खरीद स्कैंडल’ की ताजा हुई यादें
धर्मनगरी अयोध्या के मठों-मंदिरों और चौक-चौराहों पर यह मामला इस समय सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर ऐसी गंभीर चर्चाएं हैं कि चढ़ावे के पैसों को खुर्द-बुर्द करने का यह कारनामा कोई एक-दो दिन की भूल नहीं है, बल्कि पिछले चार वर्षों से यह खेल लगातार पर्दे के पीछे चल रहा था। इस बेहिसाब चोरी में ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रभावशाली पदाधिकारियों और उनके करीबियों की भूमिका पर सीधे उंगलियां उठ रही हैं।
इस पूरे प्रकरण ने कुछ समय पहले हुए बहुचर्चित ‘मंदिर जमीन खरीद स्कैंडल’ की यादें भी ताजा कर दी हैं, जिसमें करोड़ों रुपये के हेरफेर के आरोप लगे थे। तब भी शुरुआत में ट्रस्ट द्वारा केवल बैठकें, सफाई और आंतरिक जांच का हवाला देकर मामले को टाला गया था, और अब चढ़ावे की चोरी में भी वही पुरानी कार्यप्रणाली दोहराए जाने के आरोप लग रहे हैं।
संत समाज की मांग सार्वजनिक हो पाई-पाई का हिसाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए अयोध्या का संत समाज बेहद आक्रोशित है। विभिन्न मठों और आश्रमों के प्रमुख संतों के बीच यह बात तेजी से उठ रही है कि राम मंदिर देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों की आस्था और उनके खून-पसीने की कमाई के दान का केंद्र है। ऐसे में ट्रस्ट इस मामले को पूर्व न्यायाधीश से जांच कराने या आंतरिक बैठकों तक ही सीमित क्यों रख रहा है? संत समाज का साफ कहना है कि इस मामले की त्वरित आपराधिक जांच होनी चाहिए और राम मंदिर के चढ़ावे की पाई-पाई का पारदर्शी हिसाब देश की जनता के सामने सार्वजनिक किया जाना चाहिए।













