अयोध्या के राम मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर एक नया और बेहद चौंकाने वाला एंगल सामने आया है। अब यह आरोप लग रहा है कि मंदिर परिसर में सिर्फ भक्तों के चढ़ावे की ही चोरी नहीं हुई, बल्कि वहां विभिन्न निर्माण और अन्य काम करने वाले लोगों से भुगतान के बदले भारी कमीशनखोरी और पैसे वापस ऐंठने का खेल भी चल रहा था। आरोपों के मुताबिक, ट्रस्टियों ने इस मामले में लूटमार की हर सीमा पार कर दी थी और इस पूरे सिंडिकेट के बारे में चंपत राय को सब कुछ पता था।
मंदिर परिसर में काम कर चुके पीड़ितों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि कागजों पर तो उन्हें ज्यादा भुगतान (पेमेंट) दिखाया जाता था, लेकिन जैसे ही उनके खाते में पैसे ट्रांसफर होते थे, वैसे ही भुगतान कराने के नाम पर उनसे मोटी रकम वापस ले ली जाती थी। यह वसूली रामशंकर यादव टिन्नू और उसके साथियों के माध्यम से की जाती थी। पीड़ितों का दावा है कि मंदिर के कई कामों में 40% तक का भारी-भरकम कमीशन वसूला गया है। जो लोग यह पैसे देने से मना करते थे, उन्हें बुरी तरह परेशान किया जाता था और उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जाता था, जिसके चलते कई लोगों को मजबूरी में अपना काम बीच में ही छोड़ना पड़ा।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब यह सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या राम मंदिर परिसर में सिर्फ चढ़ावे की ही चोरी नहीं हो रही थी, बल्कि कामकाज और भुगतान की पूरी व्यवस्था में भी संगठित वसूली का एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय था? इस खेल में रामशंकर यादव टिन्नू और उसके साथियों के साथ-साथ ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका पर भी सीधे तौर पर सवाल उठ रहे हैं।












