उत्तर प्रदेश में 2017 से पहले की तस्वीर बेहद डरावनी थी। स्वतंत्रता के बाद से राज्य लगातार तुष्टिकरण की राजनीति की आग में झुलसता रहा। पूर्ववर्ती कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौर में डेमोग्राफिक बदलाव, जबरन धर्मांतरण, सुनियोजित दंगे और मस्जिद-मदरसे के नाम पर सरकारी व निजी जमीनों पर कब्जों की अनगिनत घटनाएं राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन चुकी थीं।
2017 के बाद योगी सरकार की सख्ती ने इस पूरे परिदृश्य को बदल दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कानून का राज स्थापित किया गया। अवैध कब्जों पर बुलडोजर चला, धर्मांतरण गिरोहों का भंडाफोड़ किया गया और कानून का पालन सुनिश्चित किया गया। संभल जिले में न्यायिक आयोग की लीक रिपोर्ट ने इस सख्ती का खुलासा किया। रिपोर्ट में सामने आया कि पूर्ववर्ती सरकारों में हिंदू आबादी को निशाना बनाया गया, जिससे उनका पलायन बढ़ा और डेमोग्राफी बिगड़ गई।
पश्चिमी यूपी के मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और नेपाल बॉर्डर के जिलों में बड़े पैमाने पर अवैध मस्जिदें, मदरसे और मजारें खड़ी की गईं। इनसे हिन्दू आबादी पर दबाव और धर्मांतरण की घटनाएं बढ़ीं। अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान जैसे माफिया नेताओं ने माफियामुक्त शासन की अनुपस्थिति में कानून का मजाक उड़ाया।
योगी सरकार के आने के बाद हालात बदले। संभल में 37 अवैध कब्जे हटाए गए, इंडो-नेपाल बॉर्डर पर 350 से ज्यादा अवैध धार्मिक स्ट्रक्चर हटाए गए, जिनमें 225 मदरसे, 30 मस्जिदें, 25 मजार और 6 ईदगाह शामिल थे। यूपी प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफुल रिलीजियस कन्वर्जन एक्ट 2021 को और सख्त कर दिया गया। अब अवैध कन्वर्जन पर 20 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये जुर्माना है, जबकि मास कन्वर्जन पर लाइफ इम्प्रिजनमेंट की व्यवस्था है।
योगी सरकार ने न केवल कानून का राज स्थापित किया, बल्कि हिन्दू तीर्थस्थलों और पौराणिक स्थलों का पुनरुद्धार भी शुरू किया। संभल में 1067 अतिक्रमण हटाकर 68.942 हेक्टेयर जमीन मुक्त कराई गई, जिसमें मस्जिदों, मजारों, कब्रिस्तानों और मदरसों से कब्जे हटाए गए। 68 पौराणिक तीर्थस्थलों और 19 प्राचीन कूपों का पुनरुद्धार किया गया। कल्कि अवतार मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों का विकास शुरू हुआ।
अतिक्रमण से मुक्त जमीनों पर स्कूल, सार्वजनिक निर्माण और गरीबों व अनुसूचित जाति के लिए आवास बनाए जा रहे हैं। प्रयागराज में अतीक अहमद के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर नए सार्वजनिक निर्माण हुए। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए, जिनमें सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी शामिल हैं।
योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति ने हिन्दू आबादी का भरोसा वापस दिलाया। घरों में लौट रहे हिन्दू, विकसित हो रहे तीर्थ और साफ-सुथरे इलाके यूपी को विकास और सुरक्षा की नई राह पर ले जा रहे हैं। इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत माना जा रहा है, जहाँ डेमोग्राफिक असंतुलन और अवैध कब्जे राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा बने हुए हैं। संक्षेप में, 2017 से पहले की तुष्टिकरण और अवैध कब्जों की राजनीति की जगह अब कानून का राज, विकास और सुरक्षा ने ले ली है। यूपी में हिन्दू आबादी की वापसी, अवैध कब्जों का सफाया और तीर्थस्थलों का पुनरुद्धार राज्य के विकास और सामाजिक सामंजस्य का प्रतीक बन गए हैं।