डेस्क : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज करने की रणनीति बनाई है। प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने की चुनौती के बीच पार्टी अब संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और बूथ प्रबंधन पर विशेष जोर देने की तैयारी में है। इस रणनीति के केंद्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे, जो नवंबर में उत्तर प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों का दौरा कर कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे।
छह क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे अमित शाह
बता दे कि प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत अमित शाह काशी, गोरखपुर, अवध, कानपुर, ब्रज और पश्चिम क्षेत्र में शक्ति केंद्र संयोजकों तथा बूथ अध्यक्षों के साथ बैठक करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य जमीनी स्तर पर संगठन की स्थिति समझना, कार्यकर्ताओं की समस्याएं जानना और आगामी चुनाव के लिए रणनीति तैयार करना होगा। इस कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व और उत्तर प्रदेश इकाई के बीच बैठक हुई थी। पार्टी की योजना है कि बड़े नेताओं और प्रमुख चेहरों के साथ बैठकों के बजाय संगठन की निचली इकाइयों से सीधे संवाद को प्राथमिकता दी जाए।
2027 में तीसरी बार सत्ता हासिल करना चुनौती
भाजपा के सामने उत्तर प्रदेश में अपनी सत्ता बरकरार रखने की चुनौती है। पार्टी को संगठन के भीतर मतभेद, जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी और कार्यकर्ताओं के उत्साह जैसे मुद्दों पर ध्यान देना पड़ रहा है। चुनावी प्रदर्शन के पिछले आंकड़ों और 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने भी संगठन को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने की जरूरत का संकेत दिया है।
2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के साथ-साथ 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने महत्वपूर्ण जीत हासिल की थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। समाजवादी पार्टी के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग पर केंद्रित राजनीतिक संदेश को भी चुनावी चर्चा में महत्वपूर्ण माना गया।
संगठन में बदलाव के बाद अब बूथ स्तर पर फोकस
भाजपा ने हाल के समय में प्रदेश संगठन में कई बदलाव किए हैं। प्रदेश अध्यक्ष, क्षेत्रीय नेतृत्व और विभिन्न संगठनात्मक इकाइयों में फेरबदल के साथ नई टीमों को जिम्मेदारी दी गई है। सरकार और संगठन के बीच तालमेल बेहतर बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
इसके बावजूद पार्टी अब बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता और कार्यकर्ताओं की भूमिका को अधिक महत्व देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष के क्षेत्रीय दौरों से मिले फीडबैक के आधार पर भी आगे की रणनीति तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
बूथों के जातीय समीकरण भी होंगे अहम
अमित शाह की प्रस्तावित बैठकों में बूथ अध्यक्षों और शक्ति केंद्र संयोजकों से स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेने पर जोर रहेगा। पार्टी बूथवार राजनीतिक स्थिति, जातीय समीकरणों, मतदाताओं के रुझान और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया को समझने की कोशिश करेगी। इन जानकारियों का इस्तेमाल चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों के चयन से जुड़े फैसलों में किया जा सकता है। हालांकि, टिकट वितरण का अंतिम आधार क्या होगा, इसे लेकर अभी किसी औपचारिक निर्णय की पुष्टि नहीं है।
1918 मंडलों तक पहुंचने की तैयारी
भाजपा की रणनीति प्रदेश के सभी 1918 मंडलों तक संगठनात्मक गतिविधियों को सक्रिय करने की है। इसके तहत पार्टी की कोशिश होगी कि संगठन की सबसे निचली इकाई तक संवाद और चुनावी तैयारी पहुंचे।
नवंबर में प्रस्तावित अमित शाह के छह क्षेत्रीय दौरों को इसी व्यापक अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना होगा कि जमीनी कार्यकर्ताओं से मिलने वाला फीडबैक भाजपा की चुनावी रणनीति को किस तरह प्रभावित करता है और 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को कितना फायदा पहुंचाता है।













