उत्तर प्रदेश सरकार भले ही यह दावा कर रही हो कि प्रदेश में गैस की कोई किल्लत नहीं है, लेकिन धरातल पर हालात बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं। कई जिलों में उपभोक्ता सुबह से ही एलपीजी गैस के लिए लंबी लाइनों में खड़े हैं, बावजूद इसके उन्हें सिलेंडर नहीं मिल रहा।

कानपुर में गैस एजेंसी पर ग्राहकों का हंगामा देखने को मिला। उपभोक्ताओं ने कई सिलेंडर रखने के बाद भी प्रदर्शन किया और सड़क पर जाम लगा दिया। वहीं, सीतापुर में गैस एजेंसी संचालिका के खिलाफ गैस सिलेंडर की कालाबाजारी के आरोप में केस दर्ज किया गया। हापुड़ में भी सुबह चार बजे से लोग एलपीजी गैस के लिए लाइन में खड़े हैं, लेकिन कई उपभोक्ताओं का कहना है कि डिलीवरी के बावजूद सिलेंडर नहीं मिला। इसके अलावा कई अन्य जिलों से भी उपभोक्ताओं ने गैस की किल्लत की शिकायत दर्ज कराई है।

जनता का आलम यह है कि लोग सुबह चार बजे से ही लाइन में खड़े होते हैं और खाली हाथ घर लौटना पड़ता है। वहीं, कुछ जगहों से ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि अगर कोई ब्लैक मार्केट में गैस लेना चाहे तो उसे तत्काल उपलब्ध हो सकती है, लेकिन कीमत 2 हजार रुपये से लेकर उससे ऊपर तक है।

हमने कई होटलों और चाय की दुकानों पर जाकर इस मुद्दे पर जानकारी ली। दुकानदारों का कहना था कि गैस 2 हजार रुपये से ऊपर ब्लैक में मिल रही है, इसी वजह से चाय की कीमत 15 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये कर दी गई है। कई रेहड़ी पटरी वालों ने अपनी दुकानें ही बंद कर दी हैं। उनका कहना है कि गैस नहीं मिल रही, तो वे दुकान कैसे चला पाएंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी गैस की यह किल्लत न केवल आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन रही है, बल्कि छोटे व्यवसाय और रेहड़ी पटरी वालों के लिए भी बड़ा आर्थिक संकट पैदा कर रही है। यदि सरकार समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं करती, तो ब्लैक मार्केट और अधिक बढ़ सकता है और कीमतें आम आदमी के बजट से बाहर हो सकती हैं।

उपभोक्ता अब सरकार से त्वरित कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह नियमित समय पर सिलेंडर प्राप्त करना चाहते हैं और ब्लैक मार्केट के चक्कर में नहीं पड़ना चाहते। इस बीच प्रशासन ने कहा है कि गैस की आपूर्ति को बढ़ाने के लिए उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल धरातल पर लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

Varanasi में शंकराचार्य Avimukteshwaranand सरस्वती ने बनाई सेना, कर दिया ये बड़ा ऐलान!

शेयर करना
Exit mobile version