लखनऊ: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं की लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सोमवार को उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा से मुलाकात कर एक मांग पत्र सौंपा। इस उच्चस्तरीय बैठक में विभागीय उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी), अंतर्जनपदीय स्थानांतरण और गंभीर रूप से बीमार शिक्षकों की तैनाती जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
नई भर्ती से पहले अंतरजनपदीय स्थानांतरण की मांग
महिला शिक्षक संघ ने पुरजोर तरीके से मांग रखी कि प्रदेश में किसी भी नई शिक्षक भर्ती या रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने से पहले अंतरजनपदीय स्थानांतरण (Inter-district Transfer) की प्रक्रिया को शत-प्रतिशत पूरा कराया जाए। संघ का तर्क है कि वर्षों से सुदूर और आकांक्षी या अति पिछड़े जिलों में तैनात शिक्षिकाएं अपने गृह जनपद से दूर रहकर मानसिक और पारिवारिक दिक्कतों का सामना कर रही हैं, जिन्हें अपने घर के पास आने का पहला अधिकार मिलना चाहिए।
बीमार शिक्षकों के लिए मानवीय दृष्टिकोण की अपील
इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने एक बेहद भावुक और जरूरी मुद्दा उठाते हुए मांग की कि जो शिक्षक या शिक्षिकाएं ओपन हार्ट सर्जरी या बाईपास सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों से गुजर चुके हैं, उन्हें मानवीय आधार पर तत्काल उनके मूल जिले में तैनाती दी जाए। वहीं, विभागीय स्तर पर भी यूपी टीईटी (UPTET) परीक्षा आयोजित कराने की बात कही गई। संघ की प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. सुलोचना मौर्य ने बताया कि अपर मुख्य सचिव ने सभी मांगों को बेहद गंभीरता और सहानुभूतिपूर्वक सुना है और जल्द ही सकारात्मक समाधान का भरोसा दिया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रांतीय उपाध्यक्ष सीमा यादव, रुचि त्रिवेदी, प्रीति सिंह और आरती चौधरी भी मुख्य रूप से मौजूद रहीं।













