ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर के बाद बाराबंकी जिले के सिरौलीगौसपुर के किंतूर गांव में शोक और गुस्से का माहौल है। गांव के लोगों ने ईरान में रहने वाले भारतीय नागरिकों और आम ईरानी नागरिकों की सलामती के लिए दुआ की और अमेरिका तथा इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की आलोचना की हैं।
बता दें, जैसे ही रविवार को इंटरनेट मीडिया के जरिए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की सूचना मिली, गांव के लोग स्तब्ध रह गए। किंतूर गांव में शोक का माहौल छा गया। स्थानीय निवासी आदिल काजमी ने बताया कि जैसे ही यह खबर मिली, लोग गहरे दुख में डूब गए। उन्होंने कहा, “हम सभी शोक मना रहे हैं और ईरान में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सलामती के लिए दुआ करते रहेंगे।”
आदिल काजमी ने इजरायल और अमेरिका के हमलों को “विश्व स्तर की गुंडागर्दी” और “आतंकी घटना” करार देते हुए कड़ी निंदा की। उनका कहना था कि यह इंसानियत को शर्मसार करने वाला मंजर है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता हैं।
बाराबंकी का किंतूर गांव ईरान-इजरायल तनाव के बीच एक बार फिर चर्चा में है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के नेता रुहोल्लाह अयातुल्ला खामेनेई के पूर्वजों का संबंध इसी गांव से बताया जाता है। स्थानीय परिवारों के अनुसार, खुमैनी का खानदान वर्षों पहले किंतूर से ईरान गया था, लेकिन उनकी जड़ें आज भी अवधी की इस माटी से जुड़ी बताई जाती हैं।
बता दें, रुहोल्लाह अयातुल्ला खुमैनी का पारिवारिक इतिहास उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किंतूर गांव से जुड़ा हुआ है। परिवार के सदस्यों के अनुसार, खुमैनी के पूर्वज अवधी क्षेत्र से ईरान के निशापुर शहर जाकर बस गए थे। खुमैनी के दादा सैयद अहमद मुसवी का संबंध किंतूर गांव से था।
बता दें, सैयद निहाल अहमद काजमी के अनुसार, खामेनेई परिवार के पूर्वज कई सौ साल पहले ईरान से भारत आए थे और फिर 19वीं सदी में वापस ईरान लौट गए थे। कहा जाता है कि खुमैनी के दादा सैयद अहमद मुसवी हिंदी, अवध के नवाबों के साथ कर्बला जियारत पर गए और वहीं से ईरान के खुमैनी शहर में जाकर बस गए, जिसके बाद उनका परिवार ‘खुमैनी’ के नाम से जाना जाने लगा।
किंतूर गांव में कभी खुमैनी या मुसवी खानदान के लगभग 550 घर हुआ करते थे, जिन्हें ‘सैयदवाड़ा’ के नाम से जाना जाता था। समय के साथ अधिकांश परिवार अन्य स्थानों पर बस गए, और अब यहां केवल पांच से सात घर ही शेष हैं। बावजूद इसके, इस वंश का नाम आज भी इलाके में सम्मान के साथ लिया जाता है।
किंतूर के खामेनेई परिवार ने लखनऊ के पुराने करामत हुसैन मुस्लिम गर्ल्स डिग्री कॉलेज की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसे बाराबंकी के इतिहास और गौरव से जुड़ा हुआ माना जाता है।
ईरान में हो रहे मौजूदा घटनाक्रम के बीच किंतूर गांव का ऐतिहासिक संबंध एक बार फिर से सुर्खियों में है। गांव के लोग चिंता और शोक के साथ-साथ, ईरान और भारत के नागरिकों की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं और ईरान में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।













