भारत में यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी पर यूक्रेन ने मंगलवार को एक “ऑफिशियल विरोध पत्र” सौंपते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है। यह पत्र भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज को दिया गया, जिसमें यूक्रेनी दूतावास के राजदूत डॉ. ओलेक्जेंडर पोलिशचुक ने छह नागरिकों की हिरासत पर चिंता जताई और उनके प्रति न्याय की अपील की।

बता दें, नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने म्यांमार में जातीय युद्ध समूहों को हथियार सप्लाई करने और उन्हें ट्रेनिंग देने के आरोप में छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए नागरिकों में से पांच यूक्रेनी हैं, जिनमें हुरबा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मैरियन और होन्चारुक मैक्सिम शामिल हैं, जबकि एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक भी शामिल है।

बता दें, यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि गिरफ्तारी के समय के बाद, दूतावास ने भारतीय अधिकारियों से संपर्क किया और हिरासत के कारणों की स्पष्टता के लिए सवाल उठाए। उनका आरोप था कि गिरफ्तारी का कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन उन्हें नहीं मिला और मीडिया में इस मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।

वहीं, NIA ने आरोप लगाया कि ये विदेशी नागरिक मिज़ोरम में बिना इजाज़त के मौजूद थे और भारत-म्यांमार सीमा को अवैध रूप से पार किया था। इसके अलावा, इन पर आरोप है कि वे एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स से जुड़े थे और भारतीय नागरिकों के खिलाफ गतिविधियों में शामिल थे, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ा।

यूक्रेनी दूतावास ने भारतीय अधिकारियों से इन नागरिकों को बिना रुकावट के कांसुलर एक्सेस देने की अपील की है और कहा कि वे अपने नागरिकों के अधिकारों के लिए पूरी तरह से कानूनी मदद प्रदान करेंगे। इसके साथ ही, दूतावास ने हिरासत में लिए गए नागरिकों के परिवारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है और स्थिति पर निगरानी रखी है।

यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि मिज़ोरम और अन्य सीमावर्ती इलाकों में विदेशी नागरिकों के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है, और कई बार इन क्षेत्रों में प्रवेश करते समय नियमों का अनजाने में उल्लंघन हो सकता है।

यह मामला भारत और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है, और दोनों देशों के बीच डिप्लोमेटिक स्तर पर इसका समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

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