नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे संसदीय परंपराओं और लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। अमित शाह ने कहा कि करीब चार दशक बाद लोकसभा स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
बता दें, संसद में इस मुद्दे पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि जब ओम बिरला को लोकसभा स्पीकर चुना गया था, तब पक्ष और विपक्ष दोनों दलों के नेताओं ने मिलकर उन्हें आसन तक पहुंचाया था। इसका अर्थ यह था कि स्पीकर को अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए दोनों पक्षों का समर्थन और स्वतंत्र वातावरण मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संसद के नियमों के अनुसार स्पीकर के फैसलों को अंतिम माना जाता है। किसी निर्णय पर असहमति जताई जा सकती है, लेकिन स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना सही नहीं है। अमित शाह ने कहा कि विपक्ष द्वारा ऐसा कदम उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा है।
वहीं, गृह मंत्री ने कहा कि लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है और पूरी दुनिया में भारतीय लोकतंत्र की प्रतिष्ठा और साख है। ऐसे में जब इस संस्था के प्रमुख यानी स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाए जाते हैं तो इसका असर केवल देश के अंदर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पड़ता है।
बता दें, अमित शाह ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में संसद के दोनों सदनों ने लोकतंत्र की नींव को और मजबूत किया है। लेकिन विपक्ष के इस कदम से उस भरोसे पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है।
उन्होंने आगे कहा कि संसद आपसी विश्वास और नियमों के आधार पर चलती है। स्पीकर सदन के संरक्षक होते हैं और पक्ष तथा विपक्ष दोनों के लिए समान रूप से जिम्मेदार होते हैं। इसलिए सदन में हर सदस्य को नियमों का पालन करना चाहिए।
अमित शाह ने कहा कि संसद कोई मेला नहीं है, बल्कि एक ऐसी संस्था है जहां नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही काम होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन में वही बातें कही जानी चाहिए जो नियमों के तहत अनुमति प्राप्त हों।



