नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल के शासनकाल पर नजर डालें तो शिक्षा मंत्रालय में सबसे ज्यादा उथल-पुथल देखने को मिली है। इस दौरान चार अलग-अलग चेहरों को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से कोई भी लगातार पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका।
स्मृति ईरानी से हुई थी शुरुआत
साल 2014 में जब मोदी सरकार पहली बार सत्ता में आई, तो स्मृति ईरानी को तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय (अब शिक्षा मंत्रालय) की जिम्मेदारी दी गई। करीब दो साल और एक महीने बाद जुलाई 2016 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया।
जावड़ेकर और निशंक का भी छोटा रहा कार्यकाल
स्मृति ईरानी की जगह प्रकाश जावड़ेकर को मंत्रालय की कमान सौंपी गई, लेकिन वह भी करीब तीन साल ही इस पद पर बने रह पाए। मई 2019 में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में रमेश पोखरियाल निशंक को शिक्षा मंत्री बनाया गया, मगर उनका कार्यकाल भी महज दो साल और एक महीने बाद जुलाई 2021 में खत्म कर दिया गया।
धर्मेंद्र प्रधान रहे सबसे लंबे समय तक
जुलाई 2021 में दूसरे कार्यकाल के बीच में धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। वह इस पद पर सबसे लंबे समय तक रहे। दो कार्यकाल को मिलाकर उनका कुल कार्यकाल पांच साल से अधिक का रहा, लेकिन तीसरे कार्यकाल के बीच में उन्हें भी यह पद छोड़ना पड़ा। इस तरह पिछले 12 वर्षों में कोई भी शिक्षा मंत्री लगातार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका।














