उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से सावन के पवित्र महीने में एक बेहद प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ के मांडी गांव के रहने वाले दो सगे भाइयों, रवि और संदीप ने आधुनिक युग में ‘श्रवण कुमार’ की मिसाल पेश की है। ये दोनों कलयुग के असली श्रवण कुमार बनकर अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर उत्तराखंड बॉर्डर तक पहुंचे हैं, जिसकी चर्चा इस वक्त पूरे इलाके में हो रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, रवि और संदीप अपनी माता राजबिरी और पिता प्रकाश को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर पुरा महादेव मंदिर, बागपत के लिए अपनी कठिन कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। इन दोनों भाइयों का यह जज्बा और माता-पिता के प्रति अगाध प्रेम व भक्ति देखकर हर कोई उनकी सराहना कर रहा है। आज के इस आधुनिक दौर में जहां लोग अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनों के लिए वक्त नहीं निकाल पाते, वहीं इन युवाओं ने अपने बुजुर्ग माता-पिता की तीर्थ यात्रा की इच्छा को इस अनोखे और कठिन तरीके से पूरा कर एक मिसाल कायम की है।
इस यात्रा के दौरान जहां एक तरफ सांवत के महीने में शिव भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है, वहीं रवि और संदीप की इस अनोखी कांवड़ यात्रा ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रास्ते में जहाँ से भी यह परिवार गुजर रहा है, लोग रुककर इनका उत्साहवर्धन कर रहे हैं और इनकी भक्ति को नमन कर रहे हैं। यह घटना समाज में पारिवारिक मूल्यों और माता-पिता की सेवा के महत्व को एक बार फिर से जीवंत करता है।



