उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि हर वर्ष विधानसभा में कम से कम 30 बैठकें आयोजित की जानी चाहिए ताकि विधायिका की कार्यवाही प्रभावी ढंग से चल सके और जनहित से जुड़े मुद्दों पर त्वरित निर्णय लिए जा सकें।
बता दें, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधान सभा अध्यक्षों से संवाद करते हुए कहा कि विधानसभा का कार्य समय पर और सही तरीके से होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि ज्यादा बैठकें आयोजित करने से न केवल प्रदेश की राजनीति में पारदर्शिता आएगी, बल्कि जनता के मुद्दों पर चर्चा और समाधान की प्रक्रिया भी तेज़ होगी।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विधायिका की कार्यवाही से जनप्रतिनिधियों का मुख्य उद्देश्य जनता के हितों की रक्षा करना है और इसके लिए समय-समय पर बैठकें आयोजित करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इसके लिए बेहतर तकनीकी व्यवस्थाओं की आवश्यकता है ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके।
वहीं, योगी आदित्यनाथ ने बताया कि अन्य प्रदेशों में विधानसभा की बैठकों की संख्या और उनकी प्रभावशीलता को देखते हुए यूपी में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहां ज्यादा से ज्यादा मुद्दों पर चर्चा हो और निर्णय लिए जाएं। उन्होंने इस बात को भी जोर देकर कहा कि विधानसभा में नियमित बैठकें जनहित के मामलों को प्राथमिकता देने में सहायक साबित होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में विधानसभा की बैठकों में नई कार्यशैली और विधायिका की कार्यवाही को पारदर्शी बनाने की दिशा में और सुधार किया जाएगा। इस सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के विधान सभा अध्यक्ष भी शामिल हुए और मुख्यमंत्री के सुझावों को गंभीरता से लिया।



