मुंबई के विश्व प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में भगवान गणेश के चढ़ावे और दान के पैसों की चोरी को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर में हुए इस करोड़ों रुपये के गबन और VIP एंट्री के नाम पर हुई लूट के मामले ने तूल पकड़ लिया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे द्वारा इस मामले में गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद अब सिद्धविनायक ट्रस्ट की तरफ से सफाई सामने आई है।
बता दें, ट्रस्ट का कहना है कि यह मामला उनकी जानकारी में काफी देर से आया और तब तक आरोपी चोर जमानत पर रिहा भी हो चुके थे। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि एक अत्यंत संगठित ‘इनसाइडर गैंग’ पिछले कई सालों से बप्पा के धन का गबन कर रहा था, लेकिन इसके बावजूद अभी तक किसी भी उच्चाधिकारी के खिलाफ कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया है। दुनियाभर में बैठे बप्पा के भक्तों में इस खबर के बाद से भारी गुस्सा और सदमा देखा जा रहा है।
सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया है कि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी इस पूरे मामले से बचने के लिए केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर इस गंभीर घोटाले को रफादफा करने की फिराक में हैं। हालांकि, राज ठाकरे के इन तीखे आरोपों के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर भी दबाव बढ़ गया है, और यह देखना अहम होगा कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच शुरू होकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाती है या नहीं।



