मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच रूस ने बड़ा बयान जारी करते हुए अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। रूस के विदेश मंत्रालय ने इस पूरे घटनाक्रम को “बिना उकसावे के किया गया हमला” बताते हुए इसे क्षेत्र में हिंसा बढ़ाने वाला कदम बताया है।
रूस के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई ने मिडिल ईस्ट में हिंसा की “अभूतपूर्व श्रृंखला” को जन्म दिया है। मंत्रालय ने दावा किया कि इस संघर्ष में भारी संख्या में नागरिक हताहत हुए हैं और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
रूस ने यह भी कहा कि इस संघर्ष के चलते वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ है। ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ रहा है।
विदेश मंत्रालय ने चिंता जताते हुए कहा कि क्षेत्र में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान की जरूरत है। रूस ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे तुरंत युद्धविराम करें और बातचीत के रास्ते पर लौटें।
रूस ने खास तौर पर नागरिक ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई और कहा कि इससे निर्दोष लोगों की जान जा रही है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
मॉस्को ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस संकट के समाधान के लिए अपनी भूमिका निभाने को तैयार है। रूसी सरकार ने कहा कि वह उपलब्ध संसाधनों के दायरे में रहकर शांति स्थापित करने के प्रयासों में सहयोग देगी।
इस बयान से पहले भी रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने ईरान के नेतृत्व से बातचीत कर हालात को शांत करने और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया था।
मिडिल ईस्ट संकट को लेकर दुनिया भर के कई देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन भी लगातार संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर न सिर्फ क्षेत्र बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और मानवीय स्थिति पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है।














