मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस ने एक बार फिर कूटनीतिक पहल की है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से टेलीफोन पर बातचीत कर ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव पर चर्चा की। यह बातचीत उस समय हुई जब इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
बता दें, विदेशी समाचार एजेंसी के अनुसार, पुतिन ने कहा कि रूस क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए मध्यस्थता करने को तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक और राजनीतिक समाधान ही सबसे प्रभावी रास्ता है।
रूस लगातार खाड़ी देशों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ संपर्क बनाए हुए है ताकि क्षेत्रीय तनाव को कम किया जा सके। पुतिन ने पहले भी इस संघर्ष के व्यापक प्रभावों को लेकर चिंता जताई थी और शांति स्थापित करने के लिए सहयोग की इच्छा व्यक्त की थी।
इसी बीच रूस और यूक्रेन के बीच भी तनाव बना हुआ है। मॉस्को ने यूक्रेन पर ईस्टर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, घोषित 32 घंटे के युद्धविराम के दौरान यूक्रेन ने लगभग 1971 बार इसका उल्लंघन किया। हालांकि यूक्रेन ने भी पलटवार करते हुए रूस पर 2299 बार युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया है।
मिडिल ईस्ट में स्थिति और जटिल हो गई है, जहां लेबनान के संगठन हिजबुल्लाह ने इजरायली सेना पर हमलों का दावा किया है। संगठन के अनुसार, उन्होंने वेस्ट बैंक और उत्तरी इजरायल में ड्रोन हमले किए।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट और यूरोप दोनों क्षेत्रों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में रूस की मध्यस्थता की पेशकश अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम मानी जा रही है, हालांकि इसका असर कितना होगा यह आने वाले समय में साफ होगा।














