प्रयागराज के माघ मेले में इस बार धर्म और खेल का अद्वितीय संगम देखने को मिला। आस्था, परंपरा और संस्कृति के बीच आयोजित कार्यक्रमों में पारंपरिक खेल ‘अंगद पांव’ ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। यह खेल न केवल माघ मेले की आस्थापूर्ण धारा में बहा, बल्कि खेल संस्कृति की नई दिशा भी प्रस्तुत की।
प्रयागराज: माघ मेले में धर्म और खेल का अनोखा संगम
प्रयागराज के माघ मेले में इस बार धर्म और खेल का अनोखा संगम देखने को मिला। आस्था, परंपरा और संस्कृति के बीच आयोजित कार्यक्रमों में पारंपरिक खेल ‘अंगद पांव’ ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्पोर्ट्स… pic.twitter.com/zBXhfIxOmV
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) February 11, 2026
यह विशेष आयोजन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्पोर्ट्स रिसर्चर डॉ. कनिष्क पाण्डेय की पहल पर स्पोर्ट्स एज ऑफ लाइफ द्वारा किया गया। डॉ. पाण्डेय ने बताया कि अंगद पांव खेल भारतीय प्राचीन परंपरा से जुड़ा है, और इसकी जड़ें रामायण काल से जोड़ी जाती हैं। इस खेल में प्रतिभागियों को एक पैर पर संतुलन बनाकर प्रतिद्वंद्वी को गिराने का प्रयास करना होता है। जो खिलाड़ी संतुलन बनाए रखता है, वही विजेता होता है।
इस प्रतियोगिता में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई पहलवानों ने हिस्सा लिया, जिनमें अर्जुन यादव, श्रीकांत कुमार तिवारी, हरेंद्र गुर्जर, और श्री नितिन यादव जैसे खिलाड़ी शामिल थे। इन खिलाड़ियों ने अपनी उत्कृष्टता और खेल भावना का प्रदर्शन किया।
आयोजकों का कहना है कि इस तरह के पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने से युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने और खेल भावना को मजबूत करने का उद्देश्य है। माघ मेले में आयोजित इस कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक नया अनुभव दिया और खेल संस्कृति के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई।













