भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व प्रमुख और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े बहुचर्चित यौन उत्पीड़न मामले में कानूनी शिकंजा एक बार फिर कसता नजर आ रहा है। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की आखिरी मोहलत दी है। अदालत ने बहुत स्पष्ट शब्दों में यह साफ कर दिया है कि यह अंतिम अवसर है, और यदि इस निर्धारित अवधि में जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो उन्हें आगे कोई और मौका नहीं दिया जाएगा।
गौरतलब है कि मजिस्ट्रेट अदालत ने पिछले दिनों छह महिला पहलवानों की ओर से दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के इस संवेदनशील मामले में बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया था। इस फैसले से आहत होकर विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहलवानों समेत चार महिला पहलवानों ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए इस बरी किए जाने के आदेश को दिल्ली की अदालत में चुनौती दी थी। इसके बाद 28 सितंबर को सिंह, दिल्ली सरकार और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को औपचारिक नोटिस जारी किए गए थे। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह की अदालत ने पिछली तारीखों पर भी समय दिया था, लेकिन जवाब दाखिल न होने पर अब अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।
पहलवानों की ओर से दायर याचिका में यह दलील दी गई है कि निचली अदालत का बरी करने का फैसला कानूनी रूप से सही नहीं है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह निर्णय रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के ‘स्पष्ट रूप से गलत और चुनिंदा आकलन’ के साथ-साथ अटकलों और अनुमानों पर आधारित है, जिसमें स्थापित कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी की गई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगे की दलीलें शुरू होने के बाद पूरी कार्यवाही बंद कमरे में होगी। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत के आगामी रुख पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।













