वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में होली का पर्व रंगभरी एकादशी से शुरू हो जाता है। ब्रज की होली से वाराणसी में होली का अलग ही रूप देखने को मिलता है। भूत, पिशाच और अघोरियों की होने वाली होली मसाने की होली के नाम से विख्यात है। मणिकर्णिका घाट पर होने वाले इस होली के आयोजन पर संकट गहराता जा रहा है। दरअसल जिस मसाने की होली को लेकर आयोजक से सदियों से होने का दावा करते है, उस होली की पौराणिकता पर सवाल खड़े करते हुए काशी विद्वत परिषद के बाद डोम राजा परिवार ने आपत्ति जताई है। डोम राजा परिवार के सदस्य विश्वनाथ चौधरी ने इसकी शिकायत पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी से कर महाश्मशान पर चिताओं के बीच होली के इस आयोजन को ना करवाए जाने की गुहार लगाई है। जबकि मसाने की होली का आयोजकों ने इसे साजिश के तहत कुछ लोगों द्वारा बंद करवाने की आशंका व्यक्त की है।
मसाने की होली के दौरान हुड़दंगई और अराजकता से परेशान डोम राजा परिवार…

काशी विद्वत परिषद के सदस्यों ने जहां एक तरफ मसाने की होली की कोई पौराणिक मान्यता न होने का दावा किया, वहीं डोम राजा परिवार ने मसाने की होली के आयोजन के दौरान शवदाह करने आए शव यात्रियों से शराब के नशे में हुड़दंग युवकों द्वारा बत्तीमीजी किए जाने और श्मशान घाट पर नशे में जलती हुई चिताओं के पास जाकर रील बनाया जाता है। काशी डोम राजा परिवार के सदस्य विश्वनाथ चौधरी ने बताया कि महाश्मशान पर महिलाओं को नहीं जाना चाहिए, लेकिन मसाने की होली के नाम पर वहां बुलाया जाता है और नशे में धुत युवक उनसे भी बत्तीमीजी करते। देश विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु और पर्यटकों के बीच काशी की छवि को एक ऐसे आयोजन के लिए धूमिल किया जाता है, जिसकी कोई मान्यता ही नहीं है। जहां तक वह जानते है कि मसान नाथ मंदिर के अंदर सिर्फ अघोरी बाबा के साथ होली खेलते है ना कि कोई आम इंसान। मसाने की होली के आयोजक गुलशन कपूर ने महाश्मशान पर होने वाली होली को पौराणिक बताते हुए काशी विद्वत परिषद पर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस आयोजन में किसी को बुलाया नहीं जाता है बल्कि लोग खुद खींचे चले आते है। यही बात काशी विद्वत परिषद को खल रहा है कि इस बड़े आयोजन में उनकी कोई भूमिका नहीं होती है।
RTI में किया गया दावा, महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर नहीं आयोजन की अनुमति
डोम राजा परिवार के सदस्यों के साथ वाराणसी के समाजसेवी अतुल कुल का दावा है कि प्रशासन भी मसाने की होली की अनुमति नहीं देती है। इसके लिए उन्होंने वर्ष 2025 का एक RTI का जवाब दिखाया जिसमें मसाने के होली के आयोजन को लेकर पूछा गया था। जिसमें बताया गया कि मसाने की होली के आयोजन को लेकर एक झांकी निकालने की अनुमति दी जाती है। जो मणिकर्णिका घाट की गली में ब्रह्मनाल मंदिर से मसान नाथ मंदिर तक होती है। ऐसे में अतुल कुल ने सवाल उठाए है कि जब मसान नाथ पर झाकी को समाप्त होने की प्रशासनिक अनुमति होती है, तो लोग कैसे मंदिर से निकल धधकती हुई चिताओं के बीच पहुंचकर भस्म की होली खेलते है ? यदि अनुमति के विपरीत कार्य हो था है तो इस पर कार्रवाई की मांग की गई है।
रिपोर्ट : नीरज कुमार जायसवाल













