नई दिल्ली: भारत इस समय एक बेहद जटिल और गंभीर स्वास्थ्य संकट (Health Crisis) के मुहाने पर खड़ा है। देश में पोषण से जुड़ी दो विपरीत समस्याएं एक साथ पैर पसार रही हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6, 2023-24) के ताजा और चौंकाने वाले आंकड़ों से साफ है कि देश का एक हिस्सा जहां अधिक वजन और मोटापे से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी कुपोषण (Malnutrition) का शिकार है। लगातार बिगड़ती लाइफस्टाइल और पोषण की कमी ने मिलकर देश के सामने ‘डबल हेल्थ इमरजेंसी’ जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
1. मोटापे की गिरफ्त में भारत: शहरी इलाकों में स्थिति सबसे खराब
सर्वे के अनुसार, देश में 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग के लोग तेजी से मोटापे का शिकार हो रहे हैं। NFHS-5 की तुलना में इस बार आंकड़ों में भारी उछाल देखा गया है:
- महिलाएं: 30.7% महिलाएं अब अधिक वजन या मोटापे की कैटेगरी में हैं।
- पुरुष: 27.3% पुरुष भी इस समस्या से ग्रसित हैं।
शहरी क्षेत्रों का हाल: शहरों में यह संकट और भी ज्यादा गहरा है। शहरी इलाकों की लगभग 43% महिलाएं और 36.3% पुरुष मोटापे या ओवरवेट की श्रेणी में आ चुके हैं।
मोटापे के मामले में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु में दर्ज की गई है।
2. खत्म नहीं हो रहा कुपोषण (Malnutrition) का दंश
एक तरफ जहां लोग मोटापे से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ देश में कम वजन (Underweight) यानी कुपोषण की समस्या खत्म होने के बजाय और बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश का लगभग हर पांचवां वयस्क (Adult) कम वजन की श्रेणी में आता है।
- पुरुषों में कम वजन की दर: 16.2% से बढ़कर 19.7% हो गई है।
- महिलाओं में कम वजन की दर: 18.7% से बढ़कर 19.7% तक पहुंच गई है।
बिहार, झारखंड, राजस्थान, असम, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कुपोषण का यह ग्राफ तेजी से ऊपर भागा है, जो पोषण संबंधी भारी असमानता को दर्शाता है।
3. डायबिटीज का साइलेंट अटैक: हर 5वां पुरुष प्रभावित
NFHS-6 के आंकड़ों ने देश में डायबिटीज (मधुमेह) को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है। 15 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी में ब्लड शुगर का स्तर खतरनाक स्तर पर है।















