नई दिल्ली: भारत सरकार ने पाकिस्तान को सख्त संदेश भेजते हुए जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी में जलविद्युत परियोजनाओं के विकास को तेज कर दिया है। यह कदम सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद उठाया गया है, जिससे भारत ने अपने जल संसाधनों का पूर्ण उपयोग करने की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और पाकिस्तान को मिलने वाले लाभ को रोकना है।
मनोहर लाल खट्टर ने की दो दिवसीय यात्रा, परियोजनाओं का निरीक्षण
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर की दो दिवसीय यात्रा के दौरान चिनाब और उसकी सहायक नदियों पर चल रही प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं की समीक्षा की। मंत्री ने सालाल, सवालकोट, रतले और चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स (CVPP) के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।
तीन प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं की समीक्षा
मनोहर लाल ने पकल दुल (1,000 मेगावाट), किरू (624 मेगावाट) और क्वार (540 मेगावाट) जैसी प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं का भी निरीक्षण किया। इन परियोजनाओं का महत्व सिर्फ बिजली उत्पादन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि चिनाब बेसिन में जल नियंत्रण के लिए भी ये महत्वपूर्ण हैं। इन परियोजनाओं से बिजली उत्पादन के अलावा क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति को मजबूत किया जाएगा और भारत की जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
निर्माण कार्यों की तेजी से समीक्षा
मनोहर लाल खट्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि इन परियोजनाओं में अब तक कई तकनीकी और निर्माण संबंधी चुनौतियों का सामना किया गया है, लेकिन अब काम में तेजी लाई जा रही है। पकल दुल और किरू जलविद्युत परियोजनाओं को दिसंबर 2026 तक चालू किया जाएगा, जबकि क्वार परियोजना मार्च 2028 तक पूरी होनी है।
सिंधु जल संधि का निलंबन: भारत की जलविद्युत योजनाओं को मिली नई गति
सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद भारत ने अपनी जलविद्युत योजनाओं को एक नई दिशा दी है। भारत का कहना है कि वह अपनी जल संसाधनों का इस्तेमाल पूरी तरह से करेगा, ताकि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिले और क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति में सुधार हो। इस कदम से भारतीय क्षेत्र से निकलने वाली पश्चिमी नदियों—सिंधु, झेलम और चिनाब के जल का अधिकतम उपयोग किया जाएगा, जो पाकिस्तान को भी लाभ पहुंचाता था।
स्थानीय लोगों से संवाद और विकास की दिशा
मनोहर लाल खट्टर ने इन परियोजनाओं की समीक्षा के अलावा स्थानीय निवासियों, इंजीनियरों और मजदूरों से भी बातचीत की। उन्होंने भूमि अधिग्रहण, रोजगार, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय विकास से जुड़ी समस्याएं सुनी और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के साथ मिलकर उनका समाधान करने का आश्वासन दिया। मंत्री ने इन परियोजनाओं के लिए काम कर रहे इंजीनियरों, तकनीशियनों और मजदूरों की सराहना की, जो कठिन भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में काम कर रहे हैं।
चिनाब बेसिन परियोजनाओं से क्षेत्रीय और राष्ट्रीय लाभ
चिनाब बेसिन में चल रही इन परियोजनाओं से न केवल जम्मू-कश्मीर के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे राष्ट्रीय ग्रिड में स्वच्छ ऊर्जा की क्षमता भी बढ़ेगी। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और रोजगार सृजन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे का भी विकास होगा। यह परियोजनाएं उत्तरी भारत में बिजली की पीक पावर डिमांड को पूरा करने में मदद करेंगी और ग्रिड संचालन को स्थिर बनाएंगी।













