भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का रास्ता अब पूरी तरह से साफ हो चुका है। चार साल की बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया है। इसका ऐलान 27 जनवरी 2026 को किया गया, और इसके लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ के बाजार में राहत मिलेगी।

भारत के लिए समझौता संतुलित

कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह समझौता भारत के लिए संतुलित है, क्योंकि यह दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत करेगा। भारतीय निर्यात पर EU का औसत 3.8% टैरिफ है, जबकि समुद्री उत्पादों पर यह 26%, और लेदर गुड्स पर 17% है। वहीं, यूरोपीय संघ से आयात होने वाली वस्तुओं पर भारत का टैरिफ औसतन 9.3% है।

यूरोपीय संघ की चाहतें

यूरोपीय संघ ने इस समझौते में कड़े पर्यावरण नियमों और कार इंपोर्ट पर टैक्स छूट की मांग की थी। हालांकि, इन मसलों पर अभी कुछ बातचीत जारी है। भारत का कृषि और डेयरी सेक्टर भी इस समझौते में अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि दोनों देशों ने एक-दूसरे के संवेदनशील पहलुओं का ध्यान रखा है।

सबसे बड़ा द्विपक्षीय व्यापार समझौता

भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह FTA, चीन और आसियान देशों के FTA से भी बड़ा है। दोनों पक्षों के लगभग 1.9 अरब लोग इस व्यापार समझौते के दायरे में आएंगे। जहां चीन-आसियान FTA में आसियान एक कस्टम्स यूनिट नहीं है, वहीं EU एक सिंगल कस्टम्स यूनिट है, जिससे यह समझौता एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौता बन गया है।

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