Gorakhpur Animal Shelter. सड़क पर घायल या बीमार पड़े स्ट्रीट डॉग्स और निराश्रित पशुओं के लिए गोरखपुर में एक नया आश्रय स्थल बनकर सामने आया है। नीलम फाउंडेशन ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जहां पशुओं की पूरी देखभाल की जाती है और उन्हें पूरी तरह से ठीक होने तक सुरक्षित रखा जाता है।

क्या है नीलम फाउंडेशन का उद्देश्य?

गोरखपुर के बालापार रोड पर स्थित इस पशु आश्रय गृह की शुरुआत 4 अप्रैल 2025 को स्ट्रीट पशु दिवस के अवसर पर की गई थी। इस आश्रय स्थल में न केवल स्ट्रीट डॉग्स, बल्कि बिल्लियां और गोवंश भी इलाज करवाने आते हैं। इस वक्त आश्रय में 100 से अधिक स्ट्रीट डॉग्स और दो गोवंश रह रहे हैं।

यह आश्रय स्थल नीलम फाउंडेशन द्वारा चलाया जा रहा है, जहां पशुओं को मनपसंद भोजन, प्यार, और दुलार दिया जाता है। उनका इलाज यहां पशु चिकित्सकों की देखरेख में होता है, और जब तक वे पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते, तब तक उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाती।

आश्रय स्थल की देखरेख और पशुओं का ख्याल

यहां के वालंटियर 24 घंटे पशुओं की देखभाल में जुटे रहते हैं। इस स्थल में आने वाले पशुओं को चिकन-चावल, और गर्मी में लस्सी जैसे विशेष आहार दिए जाते हैं। एक वालंटियर ने बताया कि वे खाना बनाते हैं और दवाइयां भी देते हैं ताकि सभी पशु स्वस्थ हो सकें।

यहां तक कि खुले में लावारिस घूमने वाले घायल पशु जैसे जो गाड़ी से घायल हुए हों या जिनके पैरों में किसी ने धारदार हथियार से चोट मारी हो, उन्हें भी रेस्क्यू किया जाता है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां पशुओं के साथ क्रूरता की गई है, लेकिन अब उन्हें यहां सुरक्षित इलाज मिल रहा है।

पशु आश्रय स्थल पर क्या विशेष बातें हैं?

  • पशुओं का इलाज: कई घायल स्ट्रीट डॉग्स और अन्य जानवरों का इलाज यहां किया जाता है। जैसे एक बछड़ा जिसे कुल्हाड़ी से गंभीर चोटें आई थीं, अब पूरी तरह से स्वस्थ हो चुका है।
  • रेस्क्यू के मामले: देवरिया और अन्य जगहों से घायल और बेसहारा पशुओं को रेस्क्यू किया जाता है। एक कुत्ते के बच्चों को कूड़े के ढेर में छोड़ दिया गया था, जिन्हें यहां लाकर इलाज किया गया।
  • प्यारी देखभाल: संस्था की सचिव नीलम जायसवाल और उनके पति विजय जायसवाल रोज़ाना आश्रय स्थल पर आते हैं और पशुओं से मिलने का कोई मौका नहीं छोड़ते। इनकी देखभाल में यह पशु पूरी तरह से स्वस्थ होते हैं और प्यार से भरे रहते हैं।

संस्था की संस्थापक का संघर्ष और प्रेरणा

नीलम जायसवाल, जिनकी किडनी फेल हो गई थी और जिन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट करवाया, अब अपनी पूरी जिंदगी बेसहारा पशुओं की देखभाल में समर्पित कर दी है। उन्होंने कहा मैं बेजुबान जानवरों को परेशान नहीं देख सकती थी, इसलिए मैंने उनकी मदद करने का निर्णय लिया और एक संस्था बनाई।

आगे का कदम : बेजुबान पशुओं के लिए एक सुरक्षित भविष्य

नीलम फाउंडेशन के जरिए न केवल पशुओं को इलाज, बल्कि सुरक्षित घर भी मिल रहा है। संस्था के वालंटियर और अन्य कार्यकर्ता अपने स्वेच्छिक प्रयासों से बेजुबान पशुओं के जीवन को बेहतर बना रहे हैं। इस पहल से गोरखपुर में पशुओं की देखभाल का एक नया उदाहरण पेश हुआ है। विजय जायसवाल ने बताया हम चाहते हैं कि जो भी पशु यहां इलाज के बाद ठीक होकर जाता है, वह अपने घर लौटे, लेकिन हम उसे पहले पूरी तरह से ठीक कर देते हैं।

समाज की जिम्मेदारी

इस आश्रय स्थल की सफलता को देखते हुए, यह भी स्पष्ट होता है कि समाज के हर सदस्य को बेजुबान जानवरों के लिए संवेदनशील होना चाहिए। नीलम फाउंडेशन का यह पहल आने वाले समय में और भी पशुओं के जीवन को बचाने का एक बड़ा कारण बनेगा।

Akhilesh के सामने मंच से गरजे Tejaswi Yadav, BJP को अल्टीमेटम देते हुए कर दिया खुला ऐलान !

शेयर करना
Exit mobile version