साउथ इंडिया में भाषा को लेकर विवाद कोई नया नहीं है…यहां पर हिंदी भाषा को लेकर विरोध और विवाद बहुत ज्यादा देखने को मिलता है…पर अब यहां पर क्षेत्रीय भाषा को लेकर भी काफी ज्यादा विवाद देखने को मिल रहा है…

इसी कड़ी में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केरल में पारित मलयालम भाषा विधेयक को लेकर अपनी चिंता जताई है। गुरुवार को सिद्धारमैया ने केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन से आग्रह किया कि वे यह विधेयक वापस लें, क्योंकि इससे कर्नाटक के सीमावर्ती कासरगोड़ जिले में रहने वाले कन्नड़ भाषी लोगों के हितों पर असर पड़ेगा।

सिद्धारमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “केरल विधानसभा द्वारा पारित मलयालम भाषा विधेयक भारत की भाषाई स्वतंत्रता पर हमला है। इस विधेयक के जरिए केरल के कन्नड़ माध्यम स्कूलों में मलयालम को पहली भाषा बना दिया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस कानून को लागू किया जाता है, तो कासरगोड़ जिले के कन्नड़ भाषी लोगों को अपनी मातृभाषा सीखने का अवसर नहीं मिलेगा।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा, “कासरगोड़ में रहने वाले लोग कर्नाटक में रहने वाले कन्नड़ भाषियों से किसी भी तरह से कम नहीं हैं। उनका हित हमारी सरकार की जिम्मेदारी है।” उन्होंने केरल की कम्युनिस्ट सरकार पर आरोप लगाया कि वह भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन कर रही है, जो कि भारत के विविधतापूर्ण समाज के खिलाफ है।

कासरगोड़ जिला प्रशासनिक रूप से केरल का हिस्सा है, लेकिन भावनात्मक रूप से यह कर्नाटक से जुड़ा हुआ है, जहां के लोग कन्नड़ भाषा और संस्कृति को लेकर अपनी पहचान रखते हैं। कर्नाटक सरकार के अलावा, कर्नाटक सीमा क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने भी केरल के राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर से इस विधेयक को मंजूरी न देने की अपील की है।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि भारत में हर नागरिक को अपनी मातृभाषा सीखने का अधिकार है, और देश की एकता और विविधता को बनाए रखने के लिए यह अधिकार जरूरी है।

Meerut में भारी बवाल | कपसाड जाने से रोके गए सपा विधायक Atul Pradhan, पुलिस से हुई तीखी नोकझोक

शेयर करना
Exit mobile version