वाराणसी। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज हाईकोर्ट ने पॉस्को मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अग्रिम जमानत दी है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सहित वादी पक्ष को कोर्ट ने इस केस में मीडिया से बात न करने का आदेश दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर होते ही काशी के विद्यामठ में ढोल नगाड़े के साथ अनुयायि और बटुक पहुंचे। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ बटुकों ने धर्म की जीत के बारे लगाते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का अभिनंदन किया। वही इस मौके पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अनुयायियों ने बटुकों में मिठाई वितरित कर हर्ष व्यक्त किया।

जानिए क्या था पूरा मामला, पॉस्को एक्ट में दर्ज हुआ था शंकराचार्य पर मुकदमा
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के ऊपर आशुतोषानंद महाराज ने बटुकों के साथ यौन शोषण का आरोप लगाकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल किया। इस दौरान उन्होंने दो बटुकों को कोर्ट के सामने लाया जहां दावा किया गया कि माघ मेले के दौरान अपने शिविर में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दोनों बटुकों का यौन शोषण किया था। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट की तरफ से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर मुकदमा दर्ज किए जाने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के ऊपर प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉस्को एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया।
अग्रिम जमानत मिलने के बाद बटुकों में खुशी, शंकराचार्य ने कही बड़ी बात…
हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मिलने पर विद्यामठ के बटुकों में खुशी का माहौल है। सैकड़ो की संख्या में पहुंचे बटुकों ने इसे बड़ी जीत बताया, तो वही अनुयायियों ने आशुतोष ब्रह्मचारी के द्वारा झूठा आरोप लगाए जाने की बात कही। वही इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बयान भी सामने आया पॉस्को केस के विषय में कुछ बोलने से इंकार करते हुए कहा कि कभी- कभी ऐसा लगता है क़ानून एक जाल है और कुछ लोगो के उसको पकड़ रखा है। वह जब चाहे उसमें किसी को फंसा दें। इस तरह के निर्णय कभी – कभी जब आते हैं तो लोगो को ढांढस बँधता है, कि नहीं ऐसा नहीं है कि जो लोग इसे जाल के रूप में उपयोग करते हैं , वो सदा सफल नहीं रहते हैं। ऐसे लोगो के मन में न्याय और न्याय के प्रक्रिया के प्रति आस्था भरूँगी होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी लड़ाई हमने कभी भी इंकार नहीं किया है ,स्वाभाविक है सनातन धर्म के विरोधियों की संख्या बढ़ी हुई है , हम लोग अपना काम कर रहे हैं और वह लोग अपना काम कर रहे हैं।


