नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या में राम मंदिर की जमीन खरीद और चंदे को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच अब एक और बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव (Former Home Secretary) एस. लक्ष्मी नारायण ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और उसके महासचिव चंपत राय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
बिग ब्रेकिंग | भारत समाचार Exclusive। वीडियो इंटरव्यू। 5 करोड़ की सोने की रामचरितमानस गायब।
“रामलला को दी सोने की रामायण,अब हिसाब नहीं मिल रहा” पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण का बड़ा खुलासा। राम मंदिर चढ़ावा और दान विवाद के बीच भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय गृह सचिव… pic.twitter.com/CHtivBKwBV
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) July 5, 2026
पूर्व गृह सचिव ने बेहद भावुक और आक्रोशित लहजे में आरोप लगाया है कि उनके परिवार द्वारा अगाध श्रद्धा के साथ भेंट की गई सोने की बेहद कीमती ‘रामचरितमानस’ को आदर सहित मंदिर में रखने के बजाय सुरक्षाकर्मियों के ‘गार्ड रूम’ में रख दिया गया है।
‘पारिवारिक जेवर पिघलाकर बनवाई थी सोने की रामचरितमानस’
पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण ने मीडिया के सामने आकर अपने परिवार की आस्था और इस पूरे घटनाक्रम की आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया, “हमारा पूरा परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी राम भक्त है। प्रभु श्रीराम के प्रति इसी अटूट आस्था के चलते हमने अपने घर के जेवर पिघलाकर सोने की बेहद विशेष और भव्य ‘रामचरितमानस’ तैयार करवाई थी।”
उन्होंने आगे बताया कि इस पवित्र ग्रंथ को रामनवमी के पहले दिन पूरे विधि-विधान के साथ राम मंदिर में स्थापित करवाया गया था।
‘4-5 महीने मंदिर में रही, फिर गार्ड रूम में फेंक दिया’
पूर्व गृह सचिव के अनुसार, शुरुआती 4 से 5 महीने तक तो वह सोने की रामचरितमानस मंदिर परिसर में ही श्रद्धा के साथ रखी गई थी और श्रद्धालु उसके दर्शन कर पा रहे थे। लेकिन इसके बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उसे वहां से हटा दिया।
एस. लक्ष्मी नारायण का दर्द:
“बाद में उस पवित्र और बहुमूल्य ग्रंथ को मंदिर के मुख्य हिस्से से हटाकर एक साधारण गार्ड रूम में रख दिया गया। जब मुझे इस बात की जानकारी हुई, तो मेरा मन बहुत आहत हुआ। एक राम भक्त के तौर पर हमारे पूरे परिवार की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।”
चंपत राय के व्यवहार से लगा झटका, सबूत होने का दावा
एस. लक्ष्मी नारायण ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की कार्यशैली और व्यवहार पर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा, “ग्रंथ को हटाए जाने के बाद मैंने कई बार ट्रस्ट से इसकी जानकारी मांगी, लेकिन मुझे कभी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। चंपत राय का व्यवहार इस पूरे मामले में बेहद निराशाजनक रहा, जिससे मुझे और मेरे परिवार को बहुत दुख पहुंचा है।”
पूर्व गृह सचिव ने साफ किया कि वे कोई हवाई आरोप नहीं लगा रहे हैं। उनके पास इस पूरी घटना, ग्रंथ के सौंपे जाने और बाद की स्थितियों के वीडियो और तस्वीरों समेत सभी पुख्ता सबूत मौजूद हैं।
दिल्ली से अयोध्या तक लगाई गुहार, अब बैठक पर टिकी नजरें
अपनी आस्था के अपमान के खिलाफ पूर्व गृह सचिव ने न्याय पाने के लिए दिल्ली, लखनऊ से लेकर अयोध्या तक के बड़े अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के दरवाजे खटखटाए हैं और अपनी गुहार लगाई है।
उन्होंने उम्मीद जताई है कि राम मंदिर ट्रस्ट की होने वाली आगामी बैठक में इस गंभीर विषय को संज्ञान में लिया जाएगा और उनके परिवार की आस्था के साथ न्याय करते हुए सोने की रामचरितमानस को पुनः उसका गरिमामयी स्थान वापस मिलेगा।














