केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को ओमान के वाणिज्य, उद्योग और निवेश संवर्धन मंत्री के साथ भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत नए अवसरों की तलाश को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की। इस बातचीत का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करना है।

बता दें, पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उनकी ओमान के मंत्री अनवर बिन हिलाल बिन हमदौन अल जाबरी के साथ टेलीफोन पर बातचीत हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने CEPA फ्रेमवर्क के तहत आपसी विकास और आर्थिक अवसरों को बढ़ाने के तरीकों पर विचार किया।

बता दें, भारत और ओमान ने पिछले वर्ष दिसंबर में CEPA पर हस्ताक्षर किए थे, जो वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवर गतिशीलता और नियामक सहयोग को व्यापक रूप से कवर करता है। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 10.61 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।

वहीं, CEPA के तहत ओमान ने अपनी 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर भारत को शून्य शुल्क पहुंच देने की पेशकश की है, जिससे भारतीय निर्यात को बड़ा लाभ मिलेगा। इसमें लगभग 99.38 प्रतिशत भारतीय निर्यात शामिल हैं। वहीं 97.96 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तुरंत शुल्क समाप्त किया जा रहा है, जिससे जेम्स-ज्वेलरी, टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सीधा फायदा होगा।

भारत ने भी इस समझौते के तहत अपनी 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क में राहत देने का निर्णय लिया है, जो ओमान से आने वाले 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करता है। हालांकि डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू, सोना-चांदी, ज्वेलरी और कुछ धातु उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा गया है।

बता दें, दोनों देशों के बीच मजबूत लोगों से लोगों के संबंध भी इस आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करते हैं। ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इसके अलावा ओमान में 6000 से अधिक भारतीय कंपनियां सक्रिय हैं।

आर्थिक सहयोग का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दोनों देशों के बीच सालाना लगभग 2 अरब डॉलर का रेमिटेंस होता है, जो इस रिश्ते की गहराई को दर्शाता है। मौजूदा समय में भारत और ओमान के बीच व्यापार 10 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और CEPA के माध्यम से आने वाले वर्षों में इसमें और बढ़ोतरी की उम्मीद है।

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