पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सुरक्षा हालात के बीच भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए देश की सुरक्षा स्थिति और रक्षा तैयारियों का विस्तृत आकलन किया।

इस अहम बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और DRDO के चेयरमैन समीर कामत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा घटनाक्रमों के साथ-साथ भारत की रणनीतिक तैयारियों पर चर्चा की गई।

दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर असर पड़ा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो रहा है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है।

28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे समुद्री मार्गों में रुकावट और बढ़ गई।

इन घटनाओं का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है, जिसका असर भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर भी पड़ सकता है।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने लोकसभा में हाल ही में पश्चिम एशिया के हालात को “चिंताजनक” बताते हुए कहा कि यह संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और मानव जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी कच्चे तेल और गैस की बड़ी जरूरतें इसी क्षेत्र से पूरी करता है। ऐसे में वहां की स्थिति का सीधा असर देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह क्षेत्र भारत के लिए सिर्फ ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए एक अहम मार्ग भी है।

हालांकि, विपक्ष ने प्रधानमंत्री के बयान को लेकर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दिया। बावजूद इसके, सरकार की ओर से स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरी कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो इसका असर लंबे समय तक वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

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