पंजाब: भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए डिजिटल फेंसिंग का कार्य शुरू हो गया है। इस आधुनिक निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाना है। पंजाब से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के कई हिस्सों में यह फेंसिंग लगाई जा चुकी है। इसकी खासियत है कि अंधेरे और खराब मौसम में भी निगरानी की जा सकेगी।
मजबूत लोहे की दीवार के साथ अत्याधुनिक तकनीक
डिजिटल फेंसिंग एक मजबूत लोहे की दीवार है, जिसमें छेद बने हैं और इसके ऊपर कोबरा तार लगाई गई है। पारंपरिक बाड़बंदी के साथ अत्याधुनिक तकनीक को जोड़कर सीमा की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
इस फेंसिंग में सेंसर, थर्मल कैमरे, लेजर तकनीक और एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए गए हैं। पंजाब से सटी लगभग साढ़े पांच सौ किलोमीटर लंबी सीमा के कई हिस्सों में यह व्यवस्था स्थापित की गई है। इसका उद्देश्य सीमा पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना है।
घुसपैठ और तस्करी पर रहेगी पैनी नजर
डिजिटल फेंसिंग में लगाए गए सेंसर जमीन में होने वाली हलचल, बाड़ से छेड़छाड़ और संदिग्ध गतिविधियों का संकेत देते हैं। इससे सीमा पर होने वाली गतिविधियों की निगरानी करने में मदद मिलेगी।
इस आधुनिक व्यवस्था के जरिए घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, सीमा पार से होने वाली घुसपैठ की गतिविधियों पर भी लगाम लगाने का उद्देश्य है।
अंधेरे और खराब मौसम में भी होगी निगरानी
डिजिटल फेंसिंग में लगे थर्मल इमेजिंग और नाइट-विजन कैमरे रात के अंधेरे में भी निगरानी करने में सक्षम हैं। इसके अलावा, सर्दियों में घने कोहरे और खराब मौसम के दौरान भी ये तकनीक मददगार होगी।
इस तरह डिजिटल फेंसिंग पारंपरिक बाड़बंदी के साथ आधुनिक निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल कर भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।














