भा.ज.पा. के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में पार्टी की आगामी केंद्रीय टीम के गठन को लेकर चर्चा जोरों पर है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी में युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता देने की बात सामने आ रही है, जिससे पार्टी के कई मौजूदा और पुराने नेता और भावी दावेदार बेचैन हैं। इन नेताओं को अपनी उम्र के कारण टीम में जगह न मिलने का डर सता रहा है। वहीं, कुछ नेताओं को हाल में दिए गए चुनावी जिम्मेदारियों से यह उम्मीद जगी है कि नई टीम में उनका भी स्थान हो सकता है।

नई केंद्रीय टीम में बड़े बदलाव की संभावना

अगले माह के मध्य में भाजपा की नई केंद्रीय टीम का ऐलान हो सकता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव जैसे प्रमुख पदों पर बड़े बदलाव की संभावना है। पार्टी में तीनों स्तरों पर आधे-आधे नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। कुछ नेताओं को इधर से उधर किया जाएगा, लेकिन बाकी का पूरी तरह से बदला जाना तय है। इसका मुख्य कारण नए नेतृत्व के तहत पार्टी को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करना है, ताकि पार्टी की गतिविधियों में और ज्यादा गतिशीलता आ सके।

टीम में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी

भा.ज.पा. की नई टीम में महिलाओं की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है। खासकर लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं को आरक्षण मिलने की संभावना को देखते हुए पार्टी के नए अध्यक्ष इस दिशा में कदम उठा सकते हैं। हालांकि, पार्टी के संविधान में केंद्रीय पदाधिकारियों के लिए एक तिहाई पदों को महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है, लेकिन इसे लागू करना इस बार भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

राज्य नेताओं को मिलेगा प्रमुख स्थान

सूत्रों का कहना है कि पार्टी में केंद्रीय पदाधिकारी के रूप में राज्यों में कार्य कर रहे कई नेताओं को जगह मिल सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि राज्यों के प्रभारी और सह प्रभारियों की नियुक्ति में जरूरी नहीं कि केवल केंद्रीय पदाधिकारियों को ही स्थान मिले, बल्कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। चूंकि प्रभारियों का काम अनुभव के लिहाज से अहम होता है, इसलिए वरिष्ठ नेताओं को इस जिम्मेदारी के लिए प्राथमिकता दी जा सकती है।

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