प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नवी मुंबई में आयोजित ‘हिंद-दी-चादर’ कार्यक्रम के अवसर पर नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर को उनकी 350वीं शहादत वर्षगांठ पर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने वीडियो संदेश के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुरु तेग बहादुर की विरासत को सामाजिक एकता और धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक बताया।

बता दें, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक और पवित्र आयोजन का हिस्सा बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने भारत के इतिहास को वीरता, समन्वय और सहयोग की परंपरा से जुड़ा बताया और कहा कि जब गुरु तेग बहादुर ने त्याग की पराकाष्ठा दिखाई, तब समाज की एकजुटता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हर वर्ग और समुदाय ने गुरुओं से प्रेरणा लेकर सत्य और संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया।

वहीं, उन्होंने ‘गुरु नानक नाम लेवा संगत’ जैसी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक एकता के इस महान यज्ञ में संगत की भूमिका हमेशा प्रेरणादायी रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश को फिर से सामाजिक सद्भाव और एकजुटता की आवश्यकता है और इस तरह के कार्यक्रम समाज को सही दिशा देने का कार्य करते हैं।

बता दें, कार्यक्रम के आयोजन के लिए महाराष्ट्र सरकार की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि यह यात्रा पिछले वर्ष नागपुर से शुरू हुई थी और तख्त श्री हजूर साहिब, नांदेड़ में इसकी भावना और प्रबल हुई। अब नवी मुंबई में यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर की वीरता की गाथा महाराष्ट्र के हजारों गांवों और कस्बों तक पहुंचाया गया है।

गौरतलब है कि गुरु तेग बहादुर को मुगल काल में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने के लिए जाना जाता है। दिल्ली में उनका बलिदान भारतीय इतिहास में साहस और आस्था की अमर मिसाल माना जाता है।

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